नई दिल्ली | त्योहारी सीजन के बीच सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 800 रुपये से ज्यादा और चांदी करीब 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गई। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहने, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के कारण सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। धनतेरस और दिवाली से पहले खरीदारी की तैयारी कर रहे उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट अहम मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में सोना करीब 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, चांदी में 1.20 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 51.750 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। वैश्विक बाजार में कमजोरी का असर भारतीय वायदा बाजार पर भी दिखाई दिया।
MCX पर सोना 800 रुपये से ज्यादा टूटा
एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 800 रुपये से अधिक गिर गया। कारोबार के दौरान यह 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,41,753 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले बंद भाव 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से 3,730 रुपये टूटकर 1,85,723 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गई।
चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे
इस साल जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को दर्ज 1,85,723 रुपये के निचले स्तर के आधार पर चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से 50 प्रतिशत से भी ज्यादा नीचे आ चुकी है।
अमेरिका की महंगाई और फेड की नीति का असर
अमेरिका में सितंबर के दौरान कोर PCE महंगाई में 0.3 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसकी सालाना दर 3.1 प्रतिशत रही। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि ने भी ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ाई हैं। निवेशक अब फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति पर नजर बनाए हुए हैं। ऊंची ब्याज दरों और मजबूत बॉन्ड यील्ड से सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना फायदेमंद है?
कीमतों में आई गिरावट से त्योहारी खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं और लंबी अवधि के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की नीति, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए खरीदारी या निवेश का फैसला करने से पहले मौजूदा भाव और अपनी जरूरत का आकलन करना जरूरी है।