कोलकाता: पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी (Contai) निवासी राजीव माइती और मिठू माइती की 3 वर्षीय मासूम बेटी श्रेया माइती गंभीर थैलेसीमिया बीमारी से जूझ रही है। जब श्रेया मात्र छह महीने की थी, तभी इस जानलेवा बीमारी का पता चला था। डॉक्टरों के अनुसार, श्रेया केवल बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) के जरिए ही पूरी तरह स्वस्थ हो सकती है, जिसके इलाज का खर्च करीब 40 से 45 लाख रुपये बताया गया है। परिवार के किसी भी सदस्य का बोन मैरो मैच न होने और इलाज के भारी-भरकम खर्च के कारण माता-पिता पूरी तरह लाचार हो चुके थे। आखिरकार मदद की गुहार लेकर वे बीजेपी कार्यालय में आयोजित सुवेंदु अधिकारी के 'जनता दरबार' पहुंचे, जहां उन्हें हरसंभव सहायता का पूरा आश्वासन मिला।
देश के बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे, डोनर न मिलने से बढ़ी चिंता
बच्ची के पिता राजीव माइती ने बताया कि वे बेटी के इलाज के लिए देश के कई बड़े अस्पतालों में जा चुके हैं। चेन्नई स्थित सीएमसी वेल्लोर (CMC Vellore), अपोलो अस्पताल और मुंबई के वाडिया अस्पताल में जांच करवाई गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। परिवार में किसी का भी बोन मैरो मैच न होने की वजह से बाहरी डोनर की जरूरत है। हालांकि, ट्रांसप्लांट और ऑपरेशन का खर्च लगभग 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंच रहा है, जिसे वहन करना इस साधारण परिवार के वश की बात नहीं है।
"कालीघाट से नबन्ना तक भटके, पिछली सरकार से नहीं मिली मदद": माता-पिता का दर्द
बच्ची की मां मिठू माइती और पिता राजीव माइती ने बताया कि वे सहायता की आस में पूर्ववर्ती सरकार के समय दर-दर भटके। उन्होंने कालीघाट, कैमक स्ट्रीट और नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय में कई बार आवेदन दिए और चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से भी कोई आर्थिक सहायता या राहत नहीं मिली, यहां तक कि मुलाकात तक नहीं हो पाई। वे लगातार सिर्फ एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर दौड़ते रहे।
सुवेंदु अधिकारी ने बंधाया ढांढस, रिलायंस जैसी संस्थाओं से मदद का दिया भरोसा
थक-हारकर दंपति अपनी मासूम बच्ची को गोद में लेकर सुवेंदु अधिकारी के जनता दरबार में पहुंचा। मामले की गंभीरता को समझते हुए सुवेंदु अधिकारी ने परिवार की पूरी बात सुनी और उन्हें आश्वस्त किया कि बच्ची के जीवन की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राजीव माइती के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि वे रिलायंस या कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों के सीएसआर (CSR) फंड और मेडिकल सहायता ट्रस्ट से संपर्क करेंगे, ताकि ऑपरेशन के लिए जरूरी फंड और डोनर की व्यवस्था कराई जा सके। इस आश्वासन के बाद पीड़ित परिवार के चेहरे पर उम्मीद की नई किरण दिखाई दी है।