केंद्र सरकार ने गेहूं से जुड़े प्रमुख उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने गेहूं के आटे के साथ मैदा, सूजी और अन्य संबंधित उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदी तत्काल प्रभाव से हटा दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से जारी अधिसूचना में निर्यात प्रतिबंध हटाने की जानकारी दी गई है। इस फैसले के बाद भारतीय कारोबारी इन उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेज सकेंगे और इसके लिए पहले लागू निर्यात प्रतिबंध की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार के इस कदम को गेहूं प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
2022 में घरेलू कीमतों पर दबाव के बीच लगा था प्रतिबंध
गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। मई 2022 में केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में तेज वृद्धि और देश की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी। इसके बाद अगस्त 2022 में गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों को भी निर्यात प्रतिबंध के दायरे में लाया गया। उस समय सरकार की प्राथमिकता घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखना था। वैश्विक बाजार में गेहूं की बढ़ती मांग के बीच भारत से होने वाले निर्यात में तेजी ने घरेलू आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाई थी वैश्विक गेहूं की मांग
वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक गेहूं आपूर्ति व्यवस्था पर काफी दबाव पड़ा था। काला सागर क्षेत्र से होने वाले परिवहन और आपूर्ति में व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी। इसी दौरान भारतीय गेहूं की मांग में भी तेजी आई और घरेलू बाजार में गेहूं तथा उससे बने उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा। सरकार ने ऐसी स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्यात पर नियंत्रण लगाने का फैसला किया था। अब परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए गेहूं से जुड़े उत्पादों के निर्यात को फिर से खोलने का निर्णय लिया गया है।
आटे के निर्यात में आई थी असाधारण तेजी
गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद वर्ष 2022 में गेहूं के आटे के विदेशी कारोबार में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी। अप्रैल से जुलाई 2022 के बीच आटे के निर्यात में करीब 200% की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस तेजी ने सरकार का ध्यान इस ओर खींचा कि गेहूं के बजाय उसके प्रसंस्कृत उत्पादों के जरिए भी बड़ी मात्रा में अनाज विदेशी बाजारों तक पहुंच रहा था। घरेलू बाजार में आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता के बीच सरकार ने इसके बाद आटा, मैदा और अन्य संबंधित उत्पादों के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। अब करीब 4 साल बाद इन उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई गई है।
निर्यात कारोबार को मिल सकता है नया सहारा
निर्यात प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय आटा और गेहूं प्रसंस्करण उद्योग को विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। भारत में गेहूं से जुड़े उत्पादों का बड़ा प्रसंस्करण आधार मौजूद है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, निर्यात में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है, इसलिए सरकार को आपूर्ति, कीमतों और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। आने वाले महीनों में घरेलू उत्पादन, उपलब्ध भंडार और बाजार की मांग यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि इस फैसले का भारतीय उपभोक्ताओं और निर्यात कारोबार पर कितना प्रभाव पड़ता है।
सरकार के फैसले से बदल सकता है गेहूं उत्पादों का बाजार
गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी रोक हटाना केवल व्यापारिक फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर किसानों, मिल संचालकों, निर्यातकों और घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। निर्यात के रास्ते खुलने से प्रसंस्करण उद्योग को नए बाजार मिल सकते हैं और भारतीय गेहूं उत्पादों की वैश्विक मौजूदगी बढ़ सकती है। दूसरी ओर, घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी, खासकर तब जब खाद्य वस्तुओं की कीमतें आम परिवारों के बजट को प्रभावित करती हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्यात को बढ़ावा देने के साथ घरेलू खाद्य सुरक्षा और कीमतों के बीच कितना प्रभावी संतुलन कायम रखा जाता है।