CG News : जांजगीर-चांपा जिले के जल संसाधन विभाग जांजगीर के सहयाक ग्रेट 2 और सहायक ग्रेड 3 के बाबू और बड़े बाबू कई सालों से एक ही सीट पर विराजमान है जिन्हें हटाने के लिए या फिर सीट बदलने के लिए अभी तक किसी कार्यपालन अभियंता द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया गया है, रिटायर कर्मचारी अगर अपनी पेंशन या ग्रेजुएटी को लेकर कार्यालय पहुंचते हैं। तो उन्हें बाबुओं द्वारा पैसे की मांग को लेकर लोकल होने का धौस दिखाते हैं और उन्हें डरा धमका कर भेज दिया जाता है वहीं पर अधिकारी के पास अगर रिटायर कर्मचारी उनकी शिकायत लेकर जाते हैं तो अधिकारी द्वारा भी नजरअंदाज कर दिया जाता हैं एक ही बाबू कई सबडिवीजन के रीडर बनकर कई सालों से जमे हुए हैं और बाकी बाबूओ को सीट नहीं दिया जा रहा है।
लोकल होने का दिखाते है धौस
जब हमारी ind24 की टीम अधिकारी से बात की तो उनका कहना यह है बाबू को काम सिखाने में टाइम लगता है वही पुराने बाबू द्वारा कार्यों को जल्द से जल्द किया जाता है जबकि ऐसा नहीं है सिंचाई विभाग में रिटायर्ड बाबुओं का भी नियम का उल्लंघन कर उनसे छुट्टियों के दिनों में कार्यालय बुलाकर कार्य करवाया जाता है यहां पुराने बाबुओं को जिनके 2 से 3 वर्ष रिटायरमेंट की बची हुई है उनको काम नहीं दिया जाता है जो बाबू कई वर्षों से एक ही सीट में बैठे हुए हैं उन्हें ही कार्यों को सौंप दिया जाता है ना बाबुओं को यहां काम सिखाया जाता है और ना ही इन्हें किसी चीज की जानकारी दिया जाता है सहायक ग्रेड 3 वर्ग के बाबू कार्यालय में सिर्फ समय व्यतीत करने आते हैं। उनसे किसी प्रकार के कार्य नहीं लिया जाता और ना ही बताया सिखाया जाता है। आए दिन यहां बाबूओ का सीट को लेकर आपस में लड़ाई झगड़े होते रहते है और अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार का एक्शन नहीं लिया जाता हैरिटायरमेंट नजदीक है तो
रिटायर कर्मचारियों से यहां के बाबू मनमानी पैसे की मांग करते हैं। और कार्य धीमी गति से करते हैं। शासन के नियमानुसार अगर कोई कर्मचारी रिटायर होता है तो उनका पेंशन 6 महीने पहले से तैयारी कर ली जाती है लेकिन सिंचाई विभाग में कर्मचारी की रिटायर होने के 1 साल तक भी उनका कार्य पूर्ण नहीं किया जाता है जब तक बाबुओं को पैसे नहीं दिया जाता तब तक वह कार्य को आगे नहीं बढ़ाता और किसी रिटायर कर्मचारी द्वारा पैसा नहीं दिया जाता तो उन्हें लोकल होने का धौस देकर डराया धमकाया जाता है यहां के कई बाबू द्वारा शासन द्वारा दिए गए मेडिकल बिल ₹200 दिया जाता है। लेकिन वह अपना मेडिकल बिल अतिरिक्त बनवा कर शाशन के पैसे का उल्लंघन किया जाता है जिससे यहां के अधिकारी चुप बैठे रहते हैं अधिकारियों का श्रेय मिलने के कारण यहां के कर्मचारियों द्वारा भी मनमानी किया जाता है अगर किसी रिटायर कर्मचारी का कार्य नहीं होने पर बोल दिया जाए तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जाता है, अगर किसी बाबू के रिटायरमेंट नजदीक है तो उन्हे दूसरे बाबू को काम सीखना चाहिए तो यहां ऐसा नहीं किया जाता है, यहां तो अगर कोई बाबू अगर रिटायर्ड हो गया है उसके बाद भी उनसे कार्य कराया जाता है।Read More: वर्मी कम्पोस्ट बैग बना आय का जरिया, गौठानों में किए विक्रय...
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