जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर पहली बार हुए उपचुनाव ने विजयपुर क्षेत्र की राजनीति को एक नई दिशा दी है। यहां बीते 34 साल से रामनिवास रावत के इर्द-गिर्द घूमने वाली कांग्रेस की राजनीति के नए द्वार खुल गए हैं, वहीं भाजपा की राजनीति कई नेताओं के लिए संकट खड़ी कर सकती है। यही वजह है कि शनिवार को उपचुनाव के बाद आगामी दिनों में विजयपुर की राजनीति दोनों ही दलों के लिए बदली-बदली सी होगी।
कई बड़े नेताओं के भविष्य पर संकट
क्योंकि उपचुनाव के दौरान मुखर हो रहे भाजपा नेताओं को साधने के लिए संगठन-सरकार ने कई प्रयास किए, बावजूद जीत नहीं मिली। यही वजह है कि भाजपा के पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा और सीताराम आदिवासी के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा है। इसके साथ ही भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र जाट का भविष्य भी ये चुनाव संकट में डाल गया।
सिंधिया ने बनाई दूरी, उनके समर्थक भी रहे नदारद
किसी दौर में रामनिवास रावत सिंधिया के श्योपुर जिले में सिपहसालार थे, लेकिन मार्च 2020 में जब सिंधिया कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आए, तब रावत उनके साथ भाजपा में नहीं गए।
विजयपुर में रामनिवास के इर्द-गिर्द घूमने वाली कांग्रेस की राजनीति अब बदली, भाजपा में रावत की हार के बाद अन्य नेताओं के रास्ते बंद होने का संकट
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