कोरोना संक्रमण की महामारी से अभी उभरे नहीं की अब बदलते मौसम की वजह से डेंगू मलेरिया की चिंता सताने लगी है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें डोर टू डोर जाकर लार्वा सर्वे कर लार्वा नष्ट कर रही है। लेकिन खाली प्लाटों में भरे पानी और गंदगी से डेंगू मलेरिया का खतरा बढ़ रहा है।
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इस साल डेंगू के 40 से ज्यादा मरीज सामने आ चुके हैं
बारिश के इस मौसम में राजधानी वासियों को कोरोना के बाद अब डेंगू का डर भी सता रहा है। राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों में डेंगू मलेरिया के मरीज निकल रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि, डेंगू मलेरिया ने अभी तेजी से अपने पैर नहीं पसारे। डेंगू मलेरिया फैलने का सबसे ज़्यादा खतरा शहर के खाली प्लाटों में भरे पानी और गंदगी से बढ़ रहा है। क्योंकि शहर में इस साल डेंगू के 40 से ज्यादा मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब आधे मरीज तो जून माह में ही सामने आए है। यह मरीज तब मिले जब बारिश नहीं हो रही थी।
लार्वा सर्वे और लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई कर रही हैं
अब जब बारिश का दौर तेजी पर है तो डेंगू, मलेरिया चिकनगुनिया के मामले भी बढ़ने की आशंका है। हालांकि स्वास्थ्य महकमा इससे निपटने के इंतजाम में जुटा है। भोपाल सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी का कहना है कि, हमारी टीमें नगर निगम के साथ मिलकर लार्वा सर्वे और लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई कर रही हैं।
भोपाल के मोहल्ले कॉलोनियों में डेंगू मलेरिया फैलने का सबसे बड़ा कारण खाली प्लॉटों में भरा पानी बनता है। ऐसे में अब खाली पड़े प्लाटों में भरा पानी नगर निगम और मलेरिया विभाग के लिए चुनोती बना हुआ है। मोहल्ले कॉलोनी में मलेरिया विभाग की टीम पहुंचकर खाली प्लॉटों में दवा छिड़कने लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई कर रही है। लेकिन निजी प्लाटों पर एक दो बार के बाद भी लार्वा मिलता है तो नगर निगम के साथ मिलकर जुर्माना भी किया जा रहा है। राजधानी में अलग-अलग कॉलोनीयो में करीब 7 हज़ार से ज्यादा से प्लॉट जो लंबे समय से खाली हैं। जहां बारिश का पानी भर जाता है। यहीं डेंगू का लार्वा पनपता है ।
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