न्यायालय के आदेश के बावजूद भरण-पोषण देने से बच रहे पतियों को कानून के दायरे में लाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा एक ऐसा कदम उठाया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए मदद भरा हाथ साबित हो रहा है। भरण-पोषण के लिए जारी होने वाली धारा 125 से जुड़े समन- वारंट महिलाओं के लिए गुजारा-भत्ता पाने की दिशा में प्रमुख कदम है, लेकिन कई बार कानून व्यवस्था बनाने की स्थिति के चलते यह प्राथमिकता क्रम में पीछे हो जाते हैं। ऐसे में आपरेशन हेल्पिंग हैंड के तहत पहली प्राथमिकता पर रखकर इसे तामील कराया जाता है।
प्रदेश में 12 हजार 744 समन-वारंट तामील कराए जा चुके
पुलिस मुख्यालय की महिला शाखा के निर्देशन में साल में दो बार चलाए जाने वाले अभियान के तहत अब तक प्रदेश में 12 हजार 744 समन-वारंट तामील कराए जा चुके हैं। इस साल एक फरवरी से अभियान फिर से शुरू किया गया है जो कि 29 फरवरी तक चलेगा। इसके अंतर्गत 10 फरवरी तक 500 से अधिक ऐसे वारंट तामील कराए जा चुके हैं। इसके तहत न्यायालय से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अंतर्गत भरण-पोषण के मामलों में जारी समन-वारंट की तामीली कराई जा रही है। वर्ष 2021 से शुरू किए गए आपरेशन हेल्पिंग हैंड के अब तक पांच चरण पूर्ण हो चुके हैं।
अभियान का छठा चरण
पीड़ित महिलाओं को भरण-पोषण के लिए नहीं करना पड़ता इंतजार डीजीपी सुधीर सक्सेना और एडीजी महिला सुरक्षा प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के निर्देशन में अभियान का छठा चरण 1 फरवरी से शुरू हुआ है, जो 29 फरवरी तक चलेगा। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पुलिस की महिला सुरक्षा शाखा द्वारा यह नवाचार किया गया है। धारा-125 के तहत दायर केस में न्यायालय से जारी समन-वारंट की प्रदेश भर के थानों और महिला डेस्क के प्रयासों तामीली कराई जाती है।
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