CG News : छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने भारत सरकार के केंद्रीय वित्त सलाहकार समिति के समक्ष बस्तर के किसानों के समस्या को उठाया। उन्होंने किसान सम्मान निधि योजना में हुई गड़बड़ी के बाद केंद्र सरकार के द्वारा किसानों को दिए गए नोटिस का विरोध किया है नोटिस करीब 7000 अपात्र किसानों को भेजा गया है जिसमे उनके बैंक खातों में केंद्र के भेजे गए करोड़ों रुपए को केंद्र सरकार को वापस लौटाने की बात कही गई है अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में सियासत भी शुरू हो गई है।
7000 किसानों ने इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया
आपको बता दें कि राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने समिति को एक रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि कोरोना काल में किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत हजारों किसानों को इस योजना से जुड़े नियमों की जानकारी नहीं थी जिसके चलते उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के करीब 7000 किसानों ने इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया इस मुद्दे को राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने केंद्रीय वित्त सलाहकार समिति की बैठक में उठाया और यह मांग की है। कि इस तरह से किसानों का पैसा उनसे वापस ना मांगा जाए क्योंकि इन पैसों को किसान 1 से 2 साल पहले खर्च कर चुके होंगे तो अभी यह पैसे वापस लौटाना उनके लिए काफी मुश्किल होगा हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजीव शुक्ला को इस मामले आश्वासित किया है कि अगर ऐसा कुछ हो रहा है। तो हम पूरी डिटेल लेकर उसे रुकवाने की कोशिश करेंगे वही इस मुद्दे पर अगर बात विपक्ष की करें तो प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला के विरोध पर तंज कसते हुए कहा है की किसान सम्मान निधि योजना के लिए किसानों का रजिस्ट्री पंजीयन और उनकी सूची भेजने का काम राज्य सरकार करती है। सरकार ने ही सूची भेजी उसी आधार पर केंद्र ने उनके खाते में राशि डाली उसमे यदि गड़बड़ी हुई तो उसका सारा दोष राज्य सरकार का है ना कि केंद्र सरकार का बात स्पष्ट होनी चाहिए आज किसान के साथ कोई बात हो रही है तो उसका दोषी तो केवल और केवल कांग्रेस है।कलेक्टर सूची बनाते जैसे-जैसे निर्देश रहते हैं
प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के बयान के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान भी सामने आया और उन्होंने इस मसले पर कहा कि पहले तो पैसे दे दिए अब वापस मांग रहे हैं यह हास्यास्पद स्थिति ह सूची को वेरीफाई कौन करता है आप जैसा बोलोगे वैसा कलेक्टर सूची बनाते जैसे-जैसे निर्देश रहते हैं वैसे वैसे बनाई जाती है उसके के बाद बार-बार नियम बदलते हैं फिर क्राइटेरिया बनाते हैं और उसके बाद कट गया कहते हैं। तो पैसा वापस मांगते हैं।आखिरकार सियासत का शिकार किसान कब तक
इस बार सियासत किसान सम्मान निधि योजना पर दिखाई दे रही है हालांकि इस मुद्दे को एक बार फिर कांग्रेस उठाकर किसानों के हक में अपनी आवाज बुलंद कर रही है भाजपा एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर तंज कर पूरा आरोप राज्य सरकार पर मढ रही है। आने समय वाले समय में यह देखने वाली बात होगी कि आखिरकार सियासत का शिकार किसान कब तक बनता है।Read More: IAS चंद्रकांत वर्मा की बढ़ी जिम्मेदारी, छत्तीसगढ़ शासन ने सौंपा कई विभाग के अतिरिक्त प्रभार......
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