आकाश सेन
भोपाल को वाटर प्लस सिटी बनाने के लिए नगर निगम भोपाल ने तैयारी कर ली है। राजधानी में सीवेज के पानी को उपचारित कर इसका पुन: उपयोग किया जा रहा है। शहर के अधिकतर इलाकों में कालोनियों को सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। अब सर्वे में मिले अंकों के आधार पर रैंकिंग तय की जाएगी।
विभिन्न क्षेत्रों में निजी, सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों का जायजा लिया
बीते चार दिनों से वाटर प्लस का सर्वे चल रहा है। केंद्रीय टीम ने पुराने शहर के साथ ही भेल क्षेत्र के इलाकों का सर्वे कर चुकी है। शहर विभिन्न इलाकों में टीम के सदस्यों ने लोगों के घरों में निजी शौचालय के साथ सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों का निरीक्षण किया। यहां की साफ सफाई के बारे में रहवासियों से भी फीडबैक लिया।
इन बिंदुओं पर सर्वे करेगी टीम
- शौचालय: साफ-सफाई, हैंडवॉश, पेपर नैपकीन, हरे-लाल डस्टबिन, प्रकाश व्यवस्था आदि को देखा जाएगा।
- वाटर बॉडी: बड़ा तालाब और छोटा तालाब का जायजा लिया जाएगा। इनमें गंदगी न हो, जालियां लगी होना चाहिए।
- सीवर ट्रीटमेंट प्लांट: किस स्थिति में चल रहे हैं। रोज पानी की टेस्टिंग हो रही है या नहीं। सीवर लाइन साफ हों।
- स्ट्रोम वाटर ड्रेनेज: नाला-नाली साफ हों। उचित अंतराल पर जालियां लगी हों। आसपास के क्षेत्र में कचरा न फैला हो।
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नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि वाटर प्लस की टीम शहर में शौचालयों के साथ मुख्य रुप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल का पुर्नउपयोग और खुले में बहने वाले सीवेज का मुआयना करेगी। स्वच्छ एप में सिटी प्रोफाइल के आधार पर स्थान का चयन किया जाता है। टीम के सदस्य यहां से मौके की फोटो एप में अपलोड करते हैं। इसी के आधार पर रैकिंग तैयार की जाती है।
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