संतोष शर्मा
आज के वैज्ञानिक दौर में जहां हर क्षेत्र में विज्ञान को महत्व दिया जाता है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड के ग्रामीण अंचलों में आज भी पुरातन परंपरा के आधार पर बारिश की सटीक भविष्यवाणी की जाती है। जिसमें टिटहरी पक्षी के अंडों के आधार पर ये अनुमान लगा लिया जाता है कि बारिश कितनी और कितने महिने होगी। हम बात कर रहे हैं निवाड़ी जिले के जियार गांव की जहां अंडों से बारिश की भविष्यवाणी की परंपरा जीवित है।
रोचक है अनुमान का आधार-
खास बात ये है कि ये परंपरा पुरातन है, लेकिन परंपरा जितनी पुरानी है उतना ही रोचक इसके अनुसार बारिश के अनुमान का आधार है। जो की पूरी तरह टिटहरी के अंडों की सख्या से जुड़ा है। मान्यता है कि टिटहरी जितने अंडे देती है उनमे से जितने अंडे चिपके होते हैं उतने महीने अच्छी बारिश होती है और जितने अंडे अलग होते हैं उतने महीने कम बारिश होती है। क्षेत्र को लोग सालों से इसी पर भरोसा करते आए हैं।
कृषि कार्य की शुरूआत का आधार भी अंडे-
प्रदे्श के अन्य हिस्सों में किसान मौसम विभाग के अनुमान के आधार पर कृषि कार्य करते हैं। लेकिन इस क्षेत्र में कृषि कार्य की शुरूआत का आधार भी अंडों से जुड़ी यही मान्यता है।
इस बार 2 माह होगी बारिश-
मानसून नजदीक है ऐसे में इस बार होने वाली बारिश का अनुमान भी जता दिया गया है। दरअसल टिटहरी ने तीन अंडे दिए हैं। जिनमे से दो अंडे आपस में चिपके हुए हैं। जबकि एक अंडा अलग है यानि की इस बार दो माह अच्छी बारिश होगी और एक माह कम बारिश होगी।
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तीन या चार अंडे देती है टिटहरी-
टिटहरी पक्षी पूरे देश में पाई जाती है। टिटहरी तीन या चार अंडे से ज्यादा नहीं देती है। टिटहरी खेतों, नदी किनारे, नालों पास गड्ढेनुमा जमीन में देती है। इन अंडों का स्वरूप मिट्टीनुमा होता है जिससे दूर से समझ ना आ सके की अंडा है।
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