कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगलों में छोड़े गए चीते जल्द ही फ्री-रेंज फॉरेस्ट में घूमेंगे। यानी मर्जी से बाहर निकलकर पसंदीदा जंगल को अपना बसेरा बनाएंगे। अभी तक जितने भी चीते पार्क की सीमा से बाहर निकले हैं, उन्होंने यूपी के ललितपुर और झांसी जिलों की ओर रुख किया है।
इसलिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने उत्तरप्रदेश के वन अधिकारियों और ग्वालियर-चंबल की सीमा से सटे झांसी और ललितपुर के अफसरों को चीता निगरानी और प्रबंधन की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है। एनटीसीए ने 28 जून को यूपी और एमपी के वन अधिकारियों की एक संयुक्त ओरिएंटेशन बैठक ग्वालियर में बुलाई है। इसमें चीतों के आबादी की ओर बढ़ने पर बनने वाली परिस्थितियों का सामना कैसे करेंगे, इसकी रणनीति बनाई जाएगी।
कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगलों में छोड़े गए चीते जल्द ही फ्री-रेंज फॉरेस्ट में घूमेंगे। यानी मर्जी से बाहर निकलकर पसंदीदा जंगल को अपना बसेरा बनाएंगे। अभी तक जितने भी चीते पार्क की सीमा से बाहर निकले हैं, उन्होंने यूपी के ललितपुर और झांसी जिलों की ओर रुख किया है।
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