कृषि के आधुनिक यंत्रों का त्याग कर आज भी प्राचीन परंपरा को अपनाते हुए नांगर बैल से खेती कर रहे पाटन ब्लॉक अंतर्गत ग्राम खपरी के किसान रामकुमार पटेल, प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ की नांगर बैल से खेत जोतकर की धान की बुआई।
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आज आधुनिक यंत्रों के आविष्कार से खेती करना सहज और सुगम हो गया है। नित नये-नये वैज्ञानिक अविष्कार हो रहे है। लेकिन कितना भी नए उन्नत तकनीक क्यूं ना आ जाये, लेकिन पुराने जमाने में किसान जिस प्रकार खेती करने के लिए तकनीक का प्रयोग करते थे वैसी खेती आज के आधुनिक यंत्रों के प्रयोग से नहीं की जा सकती।
प्राचीन समय में निंदाई, बुआई से लेकर फसल की कटाई तक किसान अपने हाथों से करते थे और आज भी प्रदेश में ऐसे कुछ किसान भाई है, जो प्राचीन समय की इस तकनीक को परंपरा के रूप में करते आ रहे है।
इसी कड़ी में पाटन ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत चुलगहन के आश्रित ग्राम खपरी में किसान रामकुमार पटेल, जो कि विगत कई वर्षों से खेती करने के लिए पुराने तरीकों को अपनाते आ रहे है और आज भी वे पुराने ढंग से खेती कर रहे है।
रामकुमार ने बताया कि, खेती करने के लिए उन्होंने अपने बाप दादाओं से सीखा और जिस तरह उन्हें सिखाया गया उसी को करते आ रहे है और आगे भी छत्तीसगढ़ की इस परंपरा को अपनाते हुए खेती करेंगे।
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