सरकार लाख दावे करती है की छात्रों को भविष्य के सवारने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। लेकिन इनकी जमीनी हकिकत तो कुछ और ही बयां करती है। हम बात कर रहे है छत्तीसगढ़ के लोरमी जिले की। जहां स्कूल तक पहुंचने के लिए छात्रों को काफी मेहनत करनी पडती है। सिर्फ छात्र ही नहीं। यहां तक पहुंचने के लिए शिक्षकों को भी काफी परेशानियों को सामना करना पड़ता है।
छात्रों को स्कूल तक पहुँचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है
ग्राम लगरा के हाई स्कूल में 9 वीं से लेकर 12 वीं तक आसपास के 8 गांवों से 250 छात्र पढ़ाई करने के लिए पहुँचते है। लेकिन इन सभी छात्रों को स्कूल तक पहुँचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है । इस स्कूल में परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। जहाँ एक ओर स्कूल जाने का जो मार्ग है वो कीचड़ से भरा हुआ है। जिसके कारण सभी छात्र अपनी सायकल को दूर खड़े करके कीचड़नुमा रास्ते पर पैदल चलते है। जिससे उनकी स्कूल ड्रेस खराब होती है तो कहीं छात्र चलते-चलते गिर भी जाते है।
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1 घण्टे पहले ही घर से निकलना पड़ता है
स्कूल सही समय पर पहुचने के लिए 1 घण्टे पहले ही घर से निकलना पड़ता है। बता दें की गावं कई सालों से सड़क न होने की मार झेल रहे है। शिक्षकों की माने तो जब से स्कूल बना है। तब से यहां सड़क नहीं है वहीं पिछले कार्यकाल में जो सरपंच थे। उन्हें 3 लाख रुपये की राशि इस रोड में मुरुम कार्य कराने के लिए दिया गया था। लेकिन सिर्फ खाना पूर्ति कर पैसा डकार गए। इसके साथ ही उच्च अधिकारी भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे है।
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