दीपांजलि शिवहरे
प्रदेश में नगरीय निकायों के पहले चरण के चुनाव के लिए प्रचार का शोर आज शाम को पांच बजे थम जाएगा। पिछले एक पखवाड़े से प्रदेश के 16 नगर निगम सहित 133 नगरीय निकायों में जमकर चुनाव प्रचार का शोर चल रहा था। उम्मीदवारों ने मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। यहां तक की इस बार प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार में खुद सुबे के मुखिया मे मोर्चा संभाला हुआ था। सीएम शिवराज ने भोपाल महापौर प्रत्याशी मालती राय के प्रचार-प्रसार में पुरी दम लगा दी है।
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पहले चरण के लिए 06 जुलाई को मतदान होगा
बता दें कि, पहले चरण के लिए 06 जुलाई को मतदान होगा। मतदान के लिए मतदान दल मंगलवार को मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगे। वहीं प्रदेश में कुल 413 नगरीय निकाय हैं। इनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं। 298 नगर परिषद में 35 नवगठित नगर परिषद भी हैं, जहां कि पहली बार नगरीय निकाय चुनाव होंगे।
347 नगरीय निकायों में चुनाव कराने के लिए कार्यक्रम घोषित किया है
प्रदेश के पूर्व में गठित 378 नगरीय निकायों में 321 नगरीय निकायों का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस तरह से 57 नगरीय निकायों में इस बार चुनाव नहीं हो रहे हैं। आयोग ने 321 नगरीय निकायों में से 318 नगरीय निकायों के और 35 नवगठित निकायों में से 29 नगर परिषदों को मिलाकर कुल 347 नगरीय निकायों में चुनाव कराने के लिए कार्यक्रम घोषित किया है।
भाजपा के दबदबे को चुनौती देने की कोशिश :
प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा बना हुआ है। भाजपा के दबदबे को इसी बात से समझा जा सकता है कि पिछले नगरीय निकाय चुनाव के दौरान प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में महापौर पद पर भाजपा ने ही बाजी मारी थी और कांग्रेस को एकतरफा पटखनी दी थी।
भाजपा-कांग्रेस पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में है
इस बार भी भाजपा पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में है, दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी पिछली गलतियों से सबक लेकर शुरू से ही चुनाव प्रचार पर जोर दिया, लेकिन पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर समाप्त होने से पहले तक अब कांग्रेस प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा ने पिछड़ती दिख रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का तूफानी दौरा है।
उन्होंने पहले चरण में शामिल सभी 13 नगर निगमों में चुनावी सभा और रोड शो कर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के महापौर पद के उम्मीदवार बड़े नेताओं के बजाय स्थानीय नेताओं के सहारे चुनावी जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।
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