Indore: राम नवमी पर इंदौर में हुए दर्दनाक हादसे में 35 लोगों की जान चली गई। दरअसल, 50 से ज्यादा लोग बेलेश्वर महादेव मंदिर (Indore Bawadi Accident) की बावड़ी में गिर गए थे। हादसे को 21 घंटे पूरे हो गए है। रेस्क्यू अपरेशन अभी तक जारी है। वहीं घायलों का इलाज एमवाय अस्पताल में किया जा रहा है। इतना ही नहीं आज मुख्यमंत्री भी मृतकों के परिजनों से मिलने के लिए इंदौर पहुंच चुके हैं।
मृतकों के अंगदान की सहमति
उन्होंने सबसे पहले अस्पताल पहुंच कर घायलों से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ मंत्री तुलसी सिलावट और कई अधिकारी मौजूद रहे। अब वह घटनास्थल जाएंगे। इसके अलावा ये भी बताया जा रहा है कि जिन भी लोगों की मृत्यु हुई है उनकी आंखें और त्वचा दान की जाएगी। इसकी सहमति परिवार के स्वजनों द्वारा दे दी गई है। परिजन अपनों को खोने का दुख तो जीवनभर (Indore Bawadi Accident) नहीं भुला पाएंगे लेकिन दूसरों को जीवन दे कर उनका जीवन रोशन जरूर कर रहे हैं। अब मृतकों की आंखों से जरूरतमंद नई जिंदगी देख सकेंगे। इसके लिए सभी शव को पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेज दिया गया है।
ऐसे में अंगदान करवाने वाली संस्था के प्रतिनिधियों ने याद दिलाया तो परजिनों की मानवता जागृत हुई और उन्होंने अंगदान के लिए सहमति दे दी। ऐसे में अब आठ मृतकों की आंखें और त्वचा दान की जाएगी जिनके नाम है दक्षा पटेल, इंद्र कुमार, भूमिका खानचंदानी, लक्ष्मी पटेल, मधु भम्मानी, जयंतीबाई, भारती कुकरेजा और कनक पटेल, इंद्र कुमार, भूमिका और जयंतीबाई।
कम पड़े स्ट्रेचर और चादर
दिनभर की मशक्कत के बाद जब पुलिस और प्रशासन का बचाव दल थक गया तो रात को सेना की मेहर रेजीमेंट ने मोर्चा संभाला। जिनके परिजन मंदिर गए थे और नहीं लौटे, ऐसी हजारों आंखें टकटकी लगाए अपनों के इंतजार में बैठी थीं। डीसीपी जोन-1 आदित्य मिश्रा ने मृतकों की पहचान के लिए उन परिवारों को दरवाजे पर बैठा दिया था, जिनके परिजन खो गए थे।
एडिशनल डीजीपी अभिनय विश्वकर्मा ने शव ले जाने के लिए स्ट्रेचर और चादर इकट्ठा कर लिए थे। सेना ने पहले बावड़ी में लगे सरिये काटे और रास्ता बनाया। फिर सैन्य अधिकारी अर्जुन सिंह कोंडल ने बचाव दल को क्रेन ट्राली से नीचे उतारा। रात करीब 12.30 बजे जवान चार शव (Indore Bawadi Accident) लेकर ऊपर आए। वहां मौजूद लोगों की भीड़ अपनों की तलाशने शवों की ओर दौड़ पड़ी। शव को जब एंबुलेंस में ले जाया गया, तो भीड़ ने वहां भी पीछा किया। रात करीब 12.43 बजे दूसरी ट्राली फिर चार शव लेकर बाहर आई।
कंपकंपाते दिखे सेना और बचाव दल के हाथ
अब सैन्य अधिकारी अर्जुन सिंह ने ज्यादा शव लाने के लिए तीसरे राउंड में सैनिक कम कर दिए। अबकी बार बचाव दल आठ शव लेकर बाहर आए। इनमें चार पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे थे। एक साथ आठ शव को ढंकने के लिए चादर और ले जाने के लिए स्ट्रेचर कम पड़ गए। 12 घंटे से पानी में होने से शव पूरी तरह गल चुके थे। बड़े-बड़े अभियान को अंजाम देने वाले जवानों के लिए बच्चों के शव सबसे भारी रहे। उनके हाथ कंपकंपाते दिखे। बच्चों के शव देखकर सेना और बचाव दल सहित वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
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