चंदा कारपेंटर
टैक्नोलॉजी के इस युग में आज हम भले कितनी ही तरक्की कर चुके हो लेकिन अभी भी कई गांव पिछड़े हुए है। ग्रामीणों को पीछे रखती उनकी रूढ़िवादी सोच और परंपराएं। राजनांदगांव के मानपुर ब्लॉक में ऐसे गांव है जहां महिलाओं को महावारी के दौरान घर से बाहर रहना पड़ता है। डोमीकला गाँव और गट्टेपयली गाँव में महावारी के दौरान महिलाओं को अपने घर से बाहर एक झोपड़ी बनाकर रहना पड़ता है। प्रशासन के साथ ही एनजीओ ने कई जागरूकता अभियान चलाएं लेकिन ग्रामीणों पर उनका कोई असर नहीं पड़ा… इस पर अब महिलाओं के हित में महाराष्ट्र की सेवाभावी दो संस्थाएं आगे आई है। महाराष्ट्र की सेवाभावी संस्थान ने झोपड़ियों को पूरी तरह से बदल दिया है। महिलाओं के लिए सेल्फ रेस्टिंग होम बनाए। अब महिलाएं पीरियड के दौरान सेल्फ रेस्टिंग होम में गांव के बाहर रह रही हैं।
महावारी में संन्यासी जैसा जीवन जीती महिलाएं, रूढिवादी सोच के आगे हारा प्रशासन
जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर दूर मानपुर ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र में ग्रामीणों का यह हाल है महिला और बालिकाओं को घर से बाहर झोपड़ी में रहना पड़ता है। जहां न कोई बल्ब है और न शौचालय। अंधेरे में महिलाएं कई परेशानियों के साथ गुजारा करती है। स्थानीय प्रशासन से लेकर कई NGO गांवों में इसे लेकर जागरूकता अभियान चला चुके है। बावजूद इसके ग्रामीणों की सोच में कोई बदलाव नहीं आ सका।
महाराष्ट्र की सेवाभावी संस्थान की खास पहल,महिलाओं के लिए बनाए सेल्फ रेसिडेंसी होम
काफी समझाइश के बावजूद राजनांदगांव के गांवों में कुप्रथा बंद नहीं होने पर सेवाभावी संस्तान ने सेल्फ रेसिडेंसी होम तैयार करने का फैसला किया। रेस्टिंग होम में सोलर एनर्जी से बिजली की सुविधा उपलब्ध है। अच्छे बेड से लेकर महिलाओं के रहने की पूरी व्यवस्था की गई है। संस्था की खास पहल के बाद महिलाएं आराम कर पा रही है। लेकिन सवाल अब भी यही कि महिलाओं को ऐसी रूढ़िवादी सोच से क्या कभी छुटकारा मिलेगा। और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति में कब तक सुधार हो पाएगा।
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