छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है। वर्तमान में दोनों सीटें कांग्रेस के पास हैं, लेकिन इस बार भाजपा और कांग्रेस एक-एक सीट जीतने की स्थिति में हैं। इसी संतुलन को देखते हुए दोनों दलों में संभावित दावेदारों ने अपनी गतिविधियाँ अचानक तेज कर दी हैं।
होली मिलन बना दावेदारी का अवसर
होली त्योहार नजदीक आते ही नेताओं ने इसे मुलाकात और नजदीकियाँ बढ़ाने का मौका बना लिया है। कई दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को रंगों की शुभकामनाएँ देने के बहाने मुलाकात कर रहे हैं और अपनी सक्रियता का संदेश दे रहे हैं। कई नेता तो इस दौरान अपना बायोडाटा सौंपकर दावेदारी को औपचारिक रूप से दर्ज भी कर रहे हैं।
राजनीतिक समीकरणों का भी चल रहा है गहन आकलन
राज्यसभा की इन दोनों सीटों को भाजपा और कांग्रेस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रही हैं। इसलिए दावेदारों की क्षेत्रीय पकड़, जातीय समीकरण और राजनीतिक अनुभव को विशेष रूप से परखा जा रहा है।
भाजपा में बस्तर और दुर्ग संभाग से संभावित नामों पर मंथन चल रहा है, वहीं कांग्रेस में सरगुजा संभाग से कई दावेदार सामने आ रहे हैं। भाजपा पहले ही कुछ नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेज चुकी है, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज स्थानीय प्रत्याशी को प्राथमिकता देने के संकेत दे चुके हैं।
दावेदारों में बढ़ी बेचैनी और दौड़भाग
चूंकि समीकरण दोनों दलों के लिए निर्णायक हैं, इसलिए उन नेताओं में अधिक बेचैनी देखी जा रही है जो लंबे समय से दावेदारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पदों की सीमित संख्या और प्रतिस्पर्धा की तीव्रता ने कई नेताओं को अब त्योहार के मौके पर भी राजनीतिक समीकरण साधने में व्यस्त कर दिया है।
होली की शुभकामनाएँ और रंगों का आदान-प्रदान अब राजनीतिक संदेशों, जोड़तोड़ और संभावनाओं की रणनीति में तब्दील हो चुका है।
बड़ी राजनीतिक जंग का संकेत दे रहा है चुनाव
यह चुनाव सिर्फ दो सीटों का नहीं, बल्कि प्रदेश की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की निगाहें इसी पर टिक गई हैं कि किस क्षेत्र और किस वर्ग से उम्मीदवार देने पर पार्टी को अधिक राजनीतिक लाभ मिलेगा।
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