CG News : रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देने और प्रदेश में कुपोषण की दर को कम करने के उद्देश्य से मिलेट मिशन योजना की शुरूआत की गई है।संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। साथ ही छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिलेट्स से बने ब्यंजनो को लोगों की थाली तक पहुँचाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों में मिलेट्स कैफ़े खोले जाने हेतु प्रोत्साहित किया गया है।योजना के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले में मिलेट्स कैफे की शुरूआत की जा रही है। योजना के अंतर्गत कोरिया जिले में भी 10 मई से कोरिया मिलेट्स कैफे का संचालन शुरू किया गया है। संचालन के एक माह के भीतर ही कोरिया मिलेट्स कैफे ने सफलता का नया कीर्तिमान रच दिया है।
मिलेट मिशन और छत्तीसगढ़
धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश ने तो इसका मुहिम छेड़ रखा है मिलेट्स मिशन।जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में कोदो, कुटकी,रागी, सावा, ज्वार आदि की खेती के साथ-साथ मिलेट्स प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त दैनिक आहार में मिलेट्स को शामिल किया गया है जिससे कुपोषण दूर हो सके छत्तीसगढ़ में स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील में मिलेट से बने व्यंजन दिए जा रहे हैं जैसे मिलेट्स कुकीज, लड्डू और सोया चक्की ।मेरे जैसे छत्तीसगढ़ निवासियों के लिए गर्व का विषय है कि मिलेट्स की खेती के लिए राज्य को राष्ट्रीय स्तर का पोषक अनाज अवार्ड 2022 सम्मान मिला है। मिलेट्स मिशन के कारण राज्य के किसान भी कोदो,कुटकी, रागी आदि की खेती के लिए रुझान दिखा रहे हैं एक समय था जब छत्तीसगढ़ में मिलेट्स को पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा कोई पूछता नहीं था उक्त पोषक तत्व से भरे अनाज को हीन दृष्टि से यथा गरीबों के भोजन कोदो कुटकी के रूप में देखा जाता था और मांग ना होने के कारण औने पौने दाम में भी बिक जाया करता था किंतु अब मिशन मिलेट्स के कारण राज्य में उक्त अनाज अच्छे दामों में बिक रहा है प्रदेश में कोदो कुटकी रागी की खेती का रकबा 69000 हेक्टेयर से बढ़कर 188000 हेक्टेयर तक पहुंच गया है हमारे सरगुजा क्षेत्र, कोरिया एवं छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों में प्राचीन समय से ही मोटा अनाज कोदो कुटकी रागी ग्रामीण अंचल का प्रमुख खाद्य पदार्थ रहा है यहां के सुपर विलेजर्स इस सुपरफूड की शक्ति को पहले ही जान चुके थे समझते थे और इसका सेवन करके पुष्ट होते थे बस्तर अंचल में तो रागी का बसिया पेज बनाकर उसका आनंद लिया जाता रहा लेकिन उक्त मिलेट्स जो वनांचल और ग्रामीण क्षेत्र तक सीमित रहा जो अब परिवर्तन और मिशन के कारण अन्य जगह पहुंच गया है राज्य में इसका समर्थन मूल्य घोषित कर उस पर खरीदी की जा रही है जिससे उत्पादन का रकबा बढ़ा है।
18 लोगों को रोजगार उपलब्ध : कोरिया मिलेट्स कैफे
कोरिया मिलेट्स कैफे ने 12 महिलाओं के साथ ही कुल 18 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है और इनके सामुहिक प्रयास से कैफे को एक माह में ही 2 लाख रूपए का शुद्ध लाभ हुआ है। कोरिया मिलेट्स कैफ़े कोरिया जिले में ज्वार, बाजरा, रागी, झंगोरा, बैरी, कंगनी, कुटकी (लघु धान्य), कोदो, चेना (चीना), सामा या सांवा, कुटकी और जौ आदि मिलेट से बने लजीज ब्यंजनो जैसे डोसा, चीला, इडली, खीर, गुलाबजामुन, कूकीज, का स्वाद लेने का एक मात्र स्थान है। ये कैफे शुरू होने के पहले दिन से ही लोंगो के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है ।यहां आने वाले उपभोक्ताओं के लिए मिलेट्स के स्वादिष्ट ब्यंजनो के साथ बैठने की बेहतरीन ब्यवस्था, उत्तम सर्विस और सेल्फी प्वाइंट का भी प्रबंध किया गया है। कैफे में सप्ताह के प्रत्येक शनिवार को म्यूजिक नाईट प्रोग्राम किया जाता है जिसकी वजह से लोग यहां आकर अपनी आउटिंग को मजेदार और खुशनुमा बनाते हैं।
आर्थिक रूप से सशक्त : महिला स्व-सहायता समूह
कोरिया मिलेट्स कैफ़े का संचालन रोशनी महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। विगत एक माह में समूह ने कैफे का संचालन करते 2 लाख रूपए की आय अर्जित करते हुए भविष्य की नई संभावनाओं को जन्म दिया है।इससे मिलेट्स का उत्पादन करने वाले किसानों को अपने उत्पाद बेचने का स्थान प्राप्त हुआ है तो दूसरी तरफ कैफे में कार्यरत लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का एक नया रास्ता भी मिला है।
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