मध्यप्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। प्रदेश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में सक्रिय होते दो चक्रवाती परिसंचरण और एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले दो दिनों तक बादल, बारिश और हवाओं की सक्रियता बढ़ने वाली है। फरवरी के मध्य में तापमान दिन में गर्म और रात में हल्का ठंडा होते हुए भी मौसम का रंग बदलने लगा है। यह वही स्थिति है, जब रतलाम सहित कुछ जिलों में रात के समय हल्की वर्षा ने बदलाव की शुरुआत स्पष्ट कर दी।
22 जिलों में बारिश और आंधी की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार इंदौर, उज्जैन, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, ग्वालियर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम वर्षा की प्रबल संभावना है। बादल छाए रहने से दिन में तापमान में मामूली गिरावट और रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। इस बदलाव के चलते रात की ठंड अब कम महसूस होने लगेगी, जबकि दिन में उमस और गर्माहट बढ़ सकती है।
भोपाल सहित कई शहरों में रहेगी बादलों की मौजूदगी
राजधानी भोपाल, देवास, सीहोर, खरगोन, बड़वानी, विदिशा, सागर, दमोह, पन्ना और सतना जैसे जिलों में बादलों की मौजूदगी का अनुमान है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार सक्रिय सिस्टम के कारण बादल तेजी से घिरेंगे और प्रदेश के बड़े हिस्से में मौसम का रुख बदलेगा।
गुरुवार तक रहेगा असर, फिर मौसम सामान्य
गुरुवार को भी ग्वालियर–चंबल संभाग के ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में गरज–चमक के साथ हल्की बारिश की स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद सिस्टम कमजोर पड़ने लगेगा और मौसम धीरे-धीरे स्थिर होता दिखाई देगा।
फरवरी में तीसरी बार बदल रहा मौसम
फरवरी की शुरुआत में ही दो बार तेज हवाओं, ओलों और बारिश ने कई क्षेत्रों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। प्रशासन द्वारा प्रभावित जिलों में सर्वे कराया गया था। अब 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का दौर शुरू होने से किसानों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। बढ़ते तापमान, अनियमित हवाओं और अचानक वर्षा के कारण रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
किसानों पर असर और चिंता
फरवरी के इस अस्थिर मौसम ने किसानों को सबसे अधिक प्रभावित किया है। कटाई की तैयारी कर रहे कई किसानों के लिए यह बारिश अतिरिक्त जोखिम लेकर आती है। गेहूं, चना और मसूर जैसी फसलों पर लगातार बदलते मौसम का प्रभाव दिखाई दे सकता है। ऐसे में मौसम के अगले दो दिनों के हालात पर किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि फरवरी के अंतिम दिनों में यह तीसरा बदलाव उनकी मेहनत पर अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकता है।
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