मुंबई - शेखर सुमन ने जब संजय दत्त से पांच मिनट के लिए देश का प्रधानमंत्री बनने की कल्पना करते हुए जनता को संबोधित करने के लिए कहा, तो अभिनेता अपने लोकप्रिय किरदार ‘मुन्ना भाई’ के अंदाज में नजर आए। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री बनने की खुशी मनाने के लिए वह विदेश नहीं जाएंगे, बल्कि देश में ही रहकर जनता के बीच समय बिताएंगे, ताकि सरकार और लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव बना रहे।
इस काल्पनिक भाषण में संजय दत्त ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर नेताओं की तस्वीरों की बजाय देश की पहचान और महात्मा गांधी के विचारों को अधिक महत्व मिलना चाहिए। अभिनेता ने गांधी जी के तीन बंदरों का जिक्र करते हुए एक चौथे बंदर की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, यदि कोई गलत होता देखता है, तो उसे सुधारने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
ट्रंप को दी ‘गांधीगिरी’ की सलाह
संजय दत्त ने अपने इस मजाकिया भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने उन्हें ‘ट्रंप मामा’ कहकर संबोधित किया और दुनिया में बढ़ते तनाव तथा हथियारों की होड़ पर कटाक्ष किया। अभिनेता ने कहा कि दुनिया में पहले ही काफी मिसाइलें हैं, इसलिए अब प्यार और बातचीत को बढ़ावा देने की जरूरत है।
अपने खास मुन्ना भाई अंदाज में उन्होंने संदेश दिया कि किसी देश को धमकी देने या उस पर हमला करने के बजाय पहले फूलों का गुलदस्ता भेजना चाहिए। अगर किसी से विवाद हो, तो उसे बातचीत और चाय पर चर्चा के जरिए सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने ट्रंप को ज्यादा विवादों में न पड़ने की सलाह देते हुए ‘गांधीगिरी’ अपनाने की बात कही।
गांधी के विचारों को बताया जरूरी
संजय दत्त की पूरी प्रस्तुति में महात्मा गांधी के अहिंसा, प्रेम और संवाद के सिद्धांतों की झलक दिखाई दी। उन्होंने अपने काल्पनिक प्रधानमंत्री भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि देश और दुनिया की समस्याओं का समाधान टकराव के बजाय आपसी समझ और बातचीत से निकाला जा सकता है।
अभिनेता ने अंत में अपने चर्चित फिल्मी अंदाज में अमेरिका जाकर ट्रंप को ‘जादू की झप्पी’ देने की बात भी कही। उनका यह पूरा संवाद हास्य और व्यंग्य के जरिए राजनीतिक तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी करने का एक मनोरंजक प्रयास था। इस एपिसोड में संजय दत्त ने अपने लोकप्रिय किरदार के अंदाज का इस्तेमाल करते हुए शांति, प्रेम और गांधी के विचारों को प्रमुखता दी।