बदलते मौसम में जुकाम, बुखार और शरीर दर्द जैसी समस्याओं को अक्सर लोग सामान्य फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक नई मेडिकल रिसर्च ने चेतावनी दी है कि फ्लू सिर्फ कुछ दिनों की परेशानी नहीं है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर टीबी जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ा सकता है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
मेडिकल जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, फ्लू का वायरस शरीर के उन इम्यून पाथवे को प्रभावित करता है, जो टीबी के बैक्टीरिया से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोध के दौरान फ्लू से संक्रमित लोगों के ब्लड सैंपल की जांच की गई। इसमें पाया गया कि फ्लू का संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे टीबी के बैक्टीरिया के सक्रिय होने का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे बढ़ जाता है टीबी का जोखिम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब शरीर फ्लू के संक्रमण से लड़ रहा होता है, तब उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में टीबी के बैक्टीरिया को शरीर में सक्रिय होने का मौका मिल जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
क्या फ्लू की वैक्सीन टीबी से बचाव कर सकती है?
स्टडी में सुझाव दिया गया है कि यदि फ्लू के संक्रमण को वैक्सीनेशन के जरिए रोका जाए, तो टीबी के मामलों में भी कमी लाई जा सकती है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस संबंध में अभी और क्लीनिकल ट्रायल्स की आवश्यकता है।
भारत में कितना व्यावहारिक है यह उपाय?
भारत में फ्लू वैक्सीन की कीमत करीब 2,000 रुपये तक है। ऐसे में पूरे देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से इसके लाभों का और गहराई से अध्ययन किया जाना जरूरी है।
फ्लू और टीबी दोनों हैं बड़ी चुनौती
दुनियाभर में हर साल करीब एक अरब लोग फ्लू से प्रभावित होते हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सांस संबंधी बीमारियों के कारण हर साल 2.9 लाख से 6.5 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में भी फ्लू और टीबी के लाखों मामले हर साल दर्ज किए जाते हैं।
किन लोगों को फ्लू वैक्सीन की सबसे ज्यादा जरूरत?
विशेषज्ञों के अनुसार, निम्न लोगों को फ्लू वैक्सीन से अधिक फायदा मिल सकता है—
डायबिटीज के मरीज
अस्थमा या अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोग
कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति
65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज
इन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए समय पर बचाव और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है।