नई दिल्ली:
दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि अगर उनकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट सामान्य है तो उन्हें हार्ट अटैक का खतरा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सामान्य लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट दिल की सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें लोगों का कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य था, फिर भी उन्हें कम उम्र में हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे एक छिपा हुआ फैक्टर Lipoprotein(a) यानी Lp(a) हो सकता है, जिसकी जांच सामान्य कोलेस्ट्रॉल टेस्ट में नहीं होती।
क्या है Lp(a), जिसे बताया जा रहा है दिल के लिए बड़ा खतरा?
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार Lp(a) एक विशेष प्रकार का लिपोप्रोटीन है, जो देखने में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जैसा होता है, लेकिन इसकी संरचना अलग होती है। इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन मौजूद रहता है, जो रक्त धमनियों में चर्बी जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। यही कारण है कि किसी व्यक्ति का एलडीएल और कुल कोलेस्ट्रॉल सामान्य होने के बावजूद उसकी धमनियों में ब्लॉकेज बनने का खतरा बना रह सकता है। चूंकि सामान्य लिपिड प्रोफाइल में इसकी जांच शामिल नहीं होती, इसलिए कई लोग इस जोखिम से अनजान रहते हैं और बीमारी का पता तब चलता है जब कोई गंभीर हृदय संबंधी समस्या सामने आ जाती है।
कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें से कई मरीज ऐसे होते हैं जिनकी नियमित हेल्थ रिपोर्ट सामान्य दिखाई देती है। डॉक्टरों का मानना है कि बढ़ा हुआ Lp(a) स्तर इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। यह तत्व मुख्य रूप से जेनेटिक होता है, यानी यह परिवार से विरासत में मिलता है। इसलिए स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम के बावजूद कुछ लोगों में इसका स्तर अधिक रह सकता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
भारत में क्यों बढ़ रहा है जोखिम?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। अनियमित जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा पहले से ही जोखिम बढ़ाते हैं। यदि किसी व्यक्ति में Lp(a) का स्तर भी अधिक हो तो खतरा कई गुना बढ़ सकता है। यही वजह है कि भारत में पश्चिमी देशों की तुलना में 10 से 15 वर्ष पहले हार्ट अटैक के मामले देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे छिपे हुए जोखिम कारकों की समय रहते पहचान बेहद जरूरी है।
किन लोगों को करवानी चाहिए यह जांच?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या गंभीर हृदय रोग का इतिहास रहा हो, उन्हें कम से कम एक बार Lp(a) टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या लंबे समय से अस्वस्थ जीवनशैली वाले लोगों को भी इस जांच पर विचार करना चाहिए। हालांकि वर्तमान में Lp(a) को सीधे कम करने का कोई आसान तरीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके बारे में जानकारी होने पर डॉक्टर अन्य जोखिम कारकों को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं और भविष्य के खतरे को कम किया जा सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली अब भी सबसे बड़ा बचाव
डॉक्टरों का कहना है कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण बेहद जरूरी हैं। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति में Lp(a) का स्तर अधिक पाया जाता है तो उसे एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को और अधिक सावधानी से नियंत्रित रखना चाहिए। समय पर जांच और जागरूकता ही हार्ट अटैक जैसे गंभीर जोखिमों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।