NEET पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मामला अब सड़क से संसद और अदालत तक पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, राहुल गांधी के बयान, संसद में हंगामा और दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह देश का सबसे बड़ा राजनीतिक और शैक्षणिक मुद्दा बन गया है। आखिर अब तक क्या-क्या हुआ और आगे क्या हो सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।
क्या है पूरा मामला?
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों का आक्रोश बढ़ गया। लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, दोबारा परीक्षा की मांग तथा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग शुरू कर दी। इसी को लेकर बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। इस दौरान कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के आरोप लगे। कई छात्रों के घायल होने की खबरें सामने आईं, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इसी कार्रवाई को लेकर विवाद और गहरा गया।
सोनम वांगचुक को हटाने पर भी बढ़ा विवाद
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को भी जंतर-मंतर से हटाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन हटाया गया, जबकि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हिस्सा थे। इस घटना के बाद मामला और अधिक राजनीतिक हो गया।
राहुल गांधी ने सरकार पर बोला हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग करना गलत है।
राहुल गांधी ने कहा कि,
"छात्रों ने ऐसा क्या अपराध किया था कि उन्हें पीटा गया? वे सिर्फ अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे थे।" उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देश में 152 पेपर लीक हुए हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रही है। राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की।
संसद में भी गूंजा मामला
मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। विपक्ष ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ और कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि वह संसदीय नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है।
दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला
छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट न हो।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि छात्र संविधान के तहत मिले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का प्रयोग कर रहे थे। ऐसे में पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों को हटाना संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत में कहा कि यदि किसी को पुलिस कार्रवाई से शिकायत है तो उसके लिए कानून में अलग प्रक्रिया उपलब्ध है।
सरकार ने यह भी कहा कि:
- उस क्षेत्र में धारा 144 लागू थी।
- पुलिसकर्मियों के घायल होने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
- कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है।
- याचिका प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई प्रतीत होती है।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता अपना पक्ष रखेंगे। दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को संसद और सड़कों पर लगातार उठाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और संसद की बहस दोनों इस मामले की दिशा तय कर सकती हैं।