मिडिल ईस्ट के हालात बिगड़ने के बाद दुबई, अबू धाबी समेत खाड़ी देशों के कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बंद पड़े हैं। इसके चलते भारतीय एयरलाइनों ने भी कई उड़ानें रद्द कर दी हैं। इससे व्यापारिक यात्राओं, पर्यटकों और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक यह व्यवधान बना रहा तो भारत की विदेश यात्रा प्रणाली और निर्यात-आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
होर्मुज जल मार्ग का बंद होना सबसे बड़ा खतरा
ईरान द्वारा 33 किलोमीटर चौड़े होर्मुज जल मार्ग को रोक देना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा झटका है। फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इस संकरे समुद्री रास्ते से दुनिया की लगभग एक चौथाई तेल सप्लाई गुजरती है। इसके उत्तरी हिस्से में ईरान और दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात तथा ओमान स्थित हैं। एशियाई देशों, विशेषकर भारत और चीन के लिए तेल आयात का यह सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। पिछले वर्ष भारत के लगभग आधे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होकर आई थी।
तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका
यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो क्रूड ऑयल में जोरदार बढ़ोतरी तय है। अनुमान है कि तेल 3.6% तक महंगा हो सकता है और कीमतें 80 से 110 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में पहुंच सकती हैं। इससे भारत का तेल आयात बिल बढ़ेगा, डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपये पर दबाव पड़ेगा। तेल के महंगे होने का मतलब है कि परिवहन लागत से लेकर रोजमर्रा की चीजें तक महंगी हो जाएंगी, जिससे महंगाई का बोझ आम लोगों पर सीधे पड़ेगा।
महंगाई और मुद्रा पर असर गहराएगा
कच्चा तेल महंगा होने के साथ ही भारत में महंगाई बढ़ेगी। आयात बिल बढ़ने पर सरकार को अधिक डॉलर खर्च करने होंगे, जिससे डॉलर मजबूत होगा और रुपये में कमजोरी आ सकती है। रुपये के कमजोर होने का असर विदेशी व्यापार, निवेश और बाजार स्थिरता पर भी पड़ेगा। शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और विदेशी निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं।
सोने-चांदी की कीमतों में बड़े उछाल की संभावना
वैश्विक तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यदि मिडिल ईस्ट का तनाव लंबा खिंचा, तो सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि सोना 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.5 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है। ऐसे स्तर आम लोगों से लेकर ज्वेलरी उद्योग तक सभी को प्रभावित करेंगे।
भारत के लिए रणनीतिक चुनौती
भारत ने हाल के महीनों में रूसी तेल की हिस्सेदारी कम करके खाड़ी देशों से आयात बढ़ाया है। ऐसे में होर्मुज जल मार्ग का अवरुद्ध होना भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन सकता है। लंबे समय तक स्थिति खराब रही, तो भारत को विकल्प तलाशने, रणनीतिक भंडार बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को नए सिरे से व्यवस्थित करने की मजबूरी होगी।
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