नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारतीय उद्योगपति और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के लिए अमेरिकी अदालत से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने गौतम अडानी और उनकी कंपनी के खिलाफ लगे घूसखोरी और धोखाधड़ी के सभी आरोपों को वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि, इस राहत के बदले अडानी समूह को अमेरिका में एक बहुत बड़ा वित्तीय निवेश करना होगा। भारतीय मुद्रा में इस निवेश की रकम करीब 96,314 करोड़ रुपये आंकी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह की ओर से निवेश की इस बड़ी प्रतिबद्धता के बाद ही मामले को खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
क्या थे गौतम अडानी पर आरोप?
गौतम अडानी और उनके सहयोगियों पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिकी बाजार से गलत तरीके से 3 बिलियन डॉलर जुटाए और उनका अनियमित इस्तेमाल किया। इसके अलावा, उनकी कंपनी 'अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड' (AGEL) को लेकर आरोप लगा था कि भारत के आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में बाजार से ऊंचे दामों पर सौर ऊर्जा बेचने का ठेका हासिल करने के लिए वहां के सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों और जनप्रप्रतिनिधियों को रिश्वत दी गई थी। अमेरिकी एजेंसियों का दावा था कि यह रिश्वत करीब 26.5 करोड़ डॉलर (लगभग 2,029 करोड़ रुपये) की थी। इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग और बाजार नियामक SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने क्रमशः आपराधिक और दीवानी मामले दर्ज किए थे।
ईरान प्रतिबंध उल्लंघन मामले में लगा जुर्माना
घूसखोरी के अलावा, अडानी पर अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी कर ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने का भी आरोप था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई की एक कंपनी के जरिए 191 मिलियन डॉलर (लगभग 1,839 करोड़ रुपये) मूल्य की एलपीजी (LPG) खरीदी गई थी। कागजों पर दावा किया गया था कि यह गैस ओमान या इराक से आई है, लेकिन बाद में जांच में खुलासा हुआ कि इसे ईरान से आयात किया गया था। अब इस मामले को भी वापस ले लिया गया है, लेकिन इसके लिए अडानी समूह को भारतीय मुद्रा में करीब 2,647 करोड़ रुपये का जुर्माना चुकाना पड़ा है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने स्पष्ट किया है कि अडानी के खिलाफ सभी मामलों का निपटारा हो गया है, हालांकि अदालत की अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
भारत में गरमाई सियासत: राहुल गांधी ने साधा निशाना
भले ही अमेरिकी अदालत से अडानी को राहत मिलती दिख रही हो, लेकिन इस समझौते को लेकर भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र की मोदी सरकार और अडानी समूह को आड़े हाथों लिया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा, "यह कोई व्यावसायिक समझौता (Business Deal) नहीं है, बल्कि यह अडानी को बचाने के लिए किया गया एक सीधा समझौता (Compromise) है।" विपक्ष का कहना है कि अमेरिका में अडानी समूह द्वारा किया जा रहा यह भारी-भरकम निवेश असल में मोदी सरकार की 'समझौते की राजनीति' का हिस्सा है, ताकि उद्योगपति को अमेरिकी कानूनी शिकंजे से बचाया जा सके।