ईरान में आम जनता का सरकार के खिलाफ विरोध 14वें दिन में पहुंच गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार विरोध की आवाजें उठ रही हैं। हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर रखी हैं, जिन्हें अब 60 घंटे से अधिक हो चुके हैं। इसी बीच अमेरिका की चेतावनी से तेहरान का सियासी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है। ईरानी संसद अध्यक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी का जवाब सख्त लहजे में दिया है।
गिरफ्तार लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने इस्लामी गणराज्य पर हमला किया तो अमेरिकी सेना और इजरायल को निशाना बनाया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब संसद में सांसद मंच की ओर बढ़ते हुए अमेरिका विरोधी नारे लगा रहे थे। इस पूरे सत्र का ईरानी सरकारी टीवी पर सीधा प्रसारण किया गया। कालीबाफ, जो एक कट्टरपंथी नेता माने जाते हैं और पहले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रह चुके हैं, ने प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की सराहना की। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से कठोरता से निपटेगी और गिरफ्तार लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी।
इजरायल हाई अलर्ट पर
उन्होंने इजरायल को “कब्जे वाला इलाका” बताते हुए कहा कि ईरान पर हमले की स्थिति में वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने, अड्डे और जहाज वैध लक्ष्य होंगे। द टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में अमेरिका की संभावित भूमिका को देखते हुए इजरायल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस बीच इंटरनेट बंदी की अवधि और बढ़ा दी गई है। इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, प्रदर्शनों के चलते पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं ठप हैं और यह बंदी 60 घंटे से ज्यादा समय से जारी है।
विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके
आईआरजीसी से जुड़े तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। शनिवार रात फार्स प्रांत के ममासानी काउंटी में प्रदर्शनकारियों ने न्यायपालिका परिसर में घुसकर एक गार्ड पोस्ट को आग के हवाले कर दिया। काउंटी के पब्लिक और रिवॉल्यूशनरी अभियोजक हसन इलाही ने बताया कि कोर्ट परिसर के कई कमरों में आग लगा दी गई थी, जो सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले ग्राउंड फ्लोर से पहली मंजिल तक फैल गई।
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