तेलअबीब. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मतदान केंद्रों पर वामपंथी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ देखकर दक्षिणपंथी समर्थकों से अपील की है कि वे जागें और वोट डालें। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि वामपंथी कार्यकर्ता मतदान केंद्रों पर टूट पड़े हैं जबकि दक्षिणपंथी कार्यकर्ता उदासीन हैं। यह जागने का समय है। खुद जाएं और दूसरों को भी लेकर जाएं तथा लिकुड को वोट दें। नेतन्याहू ने इस स्थिति को आपातकाल करार दिया। 77 वर्षीय नेतन्याहू एक और कार्यकाल की कोशिश कर रहे हैं।
अक्टूबर 7 हमले के बाद पहला चुनाव
इजरायल आज अक्टूबर 7 के हमलों और उसके बाद गाजा युद्ध के बाद अपना पहला राष्ट्रीय चुनाव कर रहा है। देश गहरे विभाजन का सामना कर रहा है। शुक्रवार के सर्वेक्षणों में नेतन्याहू का अति दक्षिणपंथी गठबंधन विपक्षी ब्लॉक के लगभग बराबर बताया गया। विपक्ष का नेतृत्व पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट कर रहे हैं। करीब पांच लाख लोग पहली बार वोट डालेंगे। अधिकांश सर्वेक्षण बताते हैं कि नेतन्याहू का गठबंधन 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत खो सकता है। विपक्ष भी सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें हासिल करने में短 रह सकता है।
नेतन्याहू के लिए व्यक्तिगत दांव
नेतन्याहू के लिए ये चुनाव राजनीतिक के साथ व्यक्तिगत भी हैं। उन पर तीन मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके पक्ष में माफी की अपील की है और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को पत्र भी लिखा है। लंबे समय से चल रहे इन मामलों ने राजनीतिक माहौल को और जटिल बना दिया है। समर्थक उन्हें मजबूत नेतृत्व देने वाला मानते हैं जबकि आलोचक आरोपों को गंभीर मुद्दा बना रहे हैं। चुनाव का नतीजा उनके राजनीतिक भविष्य को तय करेगा।
विभाजित देश और कड़ी टक्कर
इजरायल इस समय गहरे राजनीतिक और सामाजिक विभाजन से गुजर रहा है। गाजा युद्ध और अक्टूबर 7 की घटनाओं ने समाज को और बांट दिया है। दक्षिणपंथी और वामपंथी गुटों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। मतदान प्रतिशत और युवा मतदाताओं की भागीदारी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। सर्वेक्षणों में दोनों ब्लॉक करीब बताए जा रहे हैं जिससे किसी एक पक्ष के लिए स्पष्ट बहुमत मुश्किल दिख रहा है। गठबंधन सरकार बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाता
इस चुनाव में करीब पांच लाख लोग पहली बार वोट डालेंगे। ये नए मतदाता नतीजों को किसी भी दिशा में मोड़ सकते हैं। युवा पीढ़ी युद्ध, सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर अपनी राय रख रही है। दोनों पक्ष इन नए मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगे हैं। मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लगने की खबरें आ रही हैं। उच्च मतदान प्रतिशत से नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं। पार्टियां अंतिम समय तक प्रचार और अपील कर रही हैं।
चुनाव का महत्व और आगे की राह
ये चुनाव इजरायल के भविष्य की दिशा तय करेंगे। नेतन्याहू की जीत या हार से न केवल घरेलू राजनीति बल्कि क्षेत्रीय समीकरण भी प्रभावित होंगे। गाजा युद्ध के बाद सुरक्षा नीति और आंतरिक एकता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। मतगणना के बाद गठबंधन की जटिल प्रक्रिया शुरू हो सकती है। दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं कि जनता उनके साथ है। अंतिम नतीजे आने तक राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहेगी। इजरायल की जनता आज अपने भविष्य का फैसला करने निकली है।