फ्रांस के प्रसिद्ध पर्यटन नगर एवियन में आयोजित 52वें G-7 शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बनने का गौरव प्राप्त किया है। इस सम्मेलन में ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा सहित प्रमुख औद्योगिक देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर एकत्र हुए हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करना है। इसके अलावा भारत, ब्राजील, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देशों को भी विशेष आमंत्रण दिया गया है, जिससे सम्मेलन का वैश्विक महत्व और बढ़ गया है।
मोदी-ट्रंप वार्ता पर टिकी वैश्विक निगाहें
सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रस्तावित बैठक सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय में व्यापारिक शुल्क, रणनीतिक प्राथमिकताओं और पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों को लेकर कुछ मतभेद सामने आए हैं। ऐसे समय में यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता आर्थिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और सुरक्षा संबंधों को नई गति प्रदान कर सकती है।
यूक्रेन संकट पर G-7 का स्पष्ट संदेश
शिखर सम्मेलन के दौरान G-7 देशों ने यूक्रेन के प्रति अपने समर्थन को दोहराते हुए एक संयुक्त घोषणा जारी की। नेताओं ने यूक्रेनी नागरिकों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि रूस के साथ जारी संघर्ष के बीच यूक्रेन ने उल्लेखनीय दृढ़ता दिखाई है। घोषणा में यह भी कहा गया कि हाल के महीनों में युद्धक्षेत्र में हुए घटनाक्रमों ने समाधान की दिशा में नई संभावनाएं पैदा की हैं। जी-7 देशों ने यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को अपनी प्राथमिकता बताया।
अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत, ऊर्जा बाजार को राहत की उम्मीद
सम्मेलन में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का भी स्वागत किया गया। इस समझौते के तहत संघर्ष विराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने की दिशा में सहमति बनी है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, इसलिए इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। जी-7 नेताओं का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा और वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
पश्चिम एशिया और उत्तर कोरिया पर भी जताई चिंता
G-7 देशों ने पश्चिमी तट क्षेत्र में जारी हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए शांति और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और साइबर अपराध गतिविधियों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सामूहिक रूप से उन गतिविधियों का मुकाबला करना होगा जो वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन रही हैं। सम्मेलन में अपहरण से जुड़े पुराने मामलों के समाधान की भी मांग उठाई गई।
स्वास्थ्य, प्रवासन और संगठित अपराध के खिलाफ साझा रणनीति
भूराजनैतिक मुद्दों के अलावा सम्मेलन में मानवता से जुड़े विषयों पर भी व्यापक चर्चा हुई। नेताओं ने अवैध मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। साथ ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार, इबोला जैसे संक्रामक रोगों की रोकथाम और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। यह संदेश दिया गया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों और बहुपक्षीय सहयोग से ही संभव है।