नई दिल्ली / वाशिंगटन: ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज (कमर्शियल शिप) पर अमेरिकी हमले और उसमें 3 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत को लेकर देश की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर रहा था। प्रधानमंत्री की कथित 'चुप्पी' को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे कि भारत इस घटना पर अमेरिका को कड़ा और सीधा जवाब क्यों नहीं दे रहा है।
लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तमाम सवालों और घरेलू आलोचनाओं का जवाब देने के लिए 'G7 शिखर सम्मेलन' जैसे वैश्विक और बेहद महत्वपूर्ण मंच को चुना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर भारत का रुख पूरी तरह साफ कर दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप के सामने पीएम मोदी की दोटूक
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ इशारा करते हुए विश्व नेताओं के सामने कहा, "इस घटना में कई भारतीयों की जान गई है। जो नाविक समुद्री मार्गों के जरिए व्यापार करके विभिन्न देशों के बीच संपर्क सूत्र स्थापित करते हैं, उनकी सुरक्षा हमारी साझा जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहें ताकि नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।"
गौरतलब है कि करीब तीन दिन पहले ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी हमला हुआ था, जिसमें 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद अमेरिका की तरफ से दुख जताने के बजाय भारत को 'धमकाने' या आंख दिखाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद भारत के भीतर आक्रोश फैल गया था।
राहुल गांधी ने साधा था निशाना, पीएम ने मंच से दिया जवाब
इस संवेदनशील मुद्दे पर देश के भीतर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को सरकार पर तीखा हमला बोला था। राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा था, "अमेरिका इस मामले में सरेआम दादागीरी दिखा रहा है और भारत के प्रधानमंत्री एक वफादार सेवक की तरह इसे चुपचाप स्वीकार कर रहे हैं।"
मंगलवार को G7 बैठक के बड़े मंच का उपयोग करके प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल घरेलू स्तर पर विपक्ष के इन आरोपों का करारा जवाब दिया, बल्कि कूटनीतिक मर्यादा के भीतर रहते हुए अमेरिका को भी एक सख्त और कड़ा संदेश दे दिया।
मिडिल ईस्ट में शांति के प्रयासों का स्वागत
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व (मिडিল ईस्ट) में तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान दोनों देशों की ओर से दिखाई गई शांति की पहल पर संतोष व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा, "हम मध्य पूर्व में शांति स्थापना के इन प्रयासों का स्वागत करते हैं। इस टकराव के कारण हमारे मित्र देशों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाला समुद्री व्यापार बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।"
वैश्विक कूटनीति में 'विश्वास की कमी' सबसे बड़ी समस्या
पीएम मोदी ने आज के वैश्विक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा, "मौजूदा समय में दुनिया की सबसे बड़ी समस्या आपसी विश्वास और भरोसे की कमी (Lack of Trust) है। आने वाले समय में विभिन्न देशों के बीच राजनयिक और कूटनीतिक संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, यह पूरी तरह से इसी आपसी विश्वास पर निर्भर करेगा।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने सीधे टकराव से बचते हुए वैश्विक मंच पर अमेरिका को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराया है और यह साफ कर दिया है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर कतई समझौता नहीं करेगा।