नई दिल्ली - एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink के भारत में लॉन्च को लेकर एक बार फिर अड़चन सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने में देरी हो सकती है, जिससे सेवा की शुरुआत फिलहाल टल सकती है।
लेजर तकनीक पर सरकार की आपत्ति
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार को स्टारलिंक की लेजर सैटेलाइट लिंक (LISL) तकनीक पर कुछ आपत्तियां हैं। यह तकनीक सैटेलाइट्स के बीच अंतरिक्ष में ही डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम है, जिससे इंटरनेट ट्रैफिक की निगरानी और ट्रैकिंग करना मुश्किल हो सकता है। सरकार को आशंका है कि इस तरह की तकनीक से सुरक्षा से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं, खासकर सीमा पार डेटा फ्लो और संवेदनशील जानकारी को लेकर।
स्पेक्ट्रम और मंजूरी प्रक्रिया में देरी
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और अन्य रेगुलेटरी प्रक्रियाओं के बाद भी अंतिम मंजूरी पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसी कारण भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने में और समय लग सकता है। बताया जा रहा है कि भारत के पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश में स्टारलिंक की सेवाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में भारत में इसकी देरी को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
SpaceX की लगातार बातचीत जारी
SpaceX लगातार भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है और अपनी तकनीक से जुड़े कई डेमो भी प्रस्तुत कर चुकी है। कंपनी का उद्देश्य भारत में अपनी हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को जल्द शुरू करना है। फिलहाल स्थिति साफ नहीं है कि स्टारलिंक को भारत में कब तक मंजूरी मिलेगी। लेकिन इतना तय है कि सुरक्षा और रेगुलेशन से जुड़े मुद्दों के चलते यह मामला अभी और लंबा खिंच सकता है। अब सभी की नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।