साल 2026 में मौसम का व्यवहार पूरी दुनिया में असामान्य होता दिखाई दे रहा है। कहीं भीषण गर्मी के बीच अचानक बारिश हो रही है तो कहीं समुद्री तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। भारत में भी मौसम के पैटर्न ने लोगों और वैज्ञानिकों दोनों को चौंका दिया है। सामान्यतः भीषण गर्मी और लू के लिए पहचाने जाने वाले नौतपा के दौरान कई क्षेत्रों में बारिश देखने को मिल रही है, जबकि मानसून के भी तय समय से पहले सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। इन घटनाओं ने जलवायु विशेषज्ञों की चिंता को और गंभीर बना दिया है।
समुद्र का बढ़ता तापमान बना सबसे बड़ा संकेत
वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र की सतह का तेजी से बढ़ता तापमान आने वाले बड़े जलवायु संकट का संकेत हो सकता है। अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आया है कि अप्रैल 2026 में वैश्विक महासागरों का सतही तापमान लगभग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। बर्फीले ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर वैश्विक महासागरों का औसत तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया, जो इतिहास के सबसे गर्म अप्रैल महीनों में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के इस असामान्य तापमान ने वातावरणीय संतुलन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर दिखाई दे रहा है।
सुपर अलनीनो की बढ़ती आशंका से वैज्ञानिक चिंतित
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दुनिया सदी के सबसे शक्तिशाली ‘सुपर अलनीनो’ की ओर बढ़ सकती है। अलनीनो प्रशांत महासागर में बनने वाला एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जो वैश्विक तापमान को बढ़ाता है और दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। लेकिन इस बार स्थिति सामान्य अलनीनो से कहीं अधिक गंभीर मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार एक अत्यधिक शक्तिशाली सुपर अलनीनो बनने की संभावना लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यदि यह सक्रिय होता है, तो दुनिया को भीषण गर्मी, समुद्री लू, सूखा, असामान्य बारिश और कृषि संकट जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशांत महासागर में दिख रहे खतरनाक संकेत
कनाडा स्थित क्लाइमेट इमरजेंसी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. पीटर कार्टर के अनुसार, प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी समुद्री लहरों और जलवायु अस्थिरता को जन्म दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि महासागर मानो “मथ” रहा है और इससे समुद्री हीटवेव की स्थिति बन रही है। यह केवल समुद्र तक सीमित संकट नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक खाद्य उत्पादन, जल संसाधनों और मानव जीवन पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्र इसी तरह गर्म होते रहे, तो दुनिया को अब तक की सबसे गंभीर जलवायु आपदाओं में से एक का सामना करना पड़ सकता है।
भारत में समय से पहले मानसून और बदला मौसम चक्र
भारत में इस बार मौसम का बदला हुआ स्वरूप सुपर अलनीनो की आशंकाओं को और मजबूत कर रहा है। नौतपा के दौरान बारिश, तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव और मानसून की जल्द दस्तक जैसे संकेत सामान्य मौसमी चक्र से अलग माने जा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि महासागरों के बढ़ते तापमान का सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है। यदि सुपर अलनीनो सक्रिय हुआ, तो कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन, जल संकट और खाद्य महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है।
2024 के बाद और गंभीर हुआ जलवायु संकट
धरती ने हाल ही में जून 2023 से अप्रैल 2024 तक चले अलनीनो का प्रभाव देखा था, जिसने वैश्विक तापमान के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। वर्ष 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष माना गया, जब वैश्विक तापमान वृद्धि पहली बार 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा को पार कर गई। पेरिस जलवायु समझौते में इसी सीमा को चेतावनी रेखा माना गया था, जिसके बाद जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अधिक विनाशकारी हो सकते हैं। अब वैज्ञानिकों को डर है कि यदि सुपर अलनीनो और अधिक शक्तिशाली रूप में सामने आया, तो दुनिया को भीषण जलवायु असंतुलन, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है।