कोलकता.पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, जिन्हें कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था, अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आएंगी। राज्य सरकार द्वारा उन्हें विकास कार्यों की प्रधान समन्वयक के पद पर बनाए रखने और अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने को प्रशासनिक निरंतरता और अनुभव आधारित निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला नई सरकार की व्यावहारिक प्रशासनिक रणनीति का संकेत भी माना जा रहा है।
सीमा सुरक्षा से जुड़ा मिला सबसे अहम दायित्व
सूत्रों के अनुसार नंदिनी चक्रवर्ती को जो सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराना है। यह विषय लंबे समय से संवेदनशील और प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। राज्य सरकार चाहती है कि अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाए, ताकि सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा सके। इस जिम्मेदारी को राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय दोनों दृष्टियों से बेहद अहम माना जा रहा है।
पहली कैबिनेट बैठक में हुआ महत्वपूर्ण फैसला
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई राज्य कैबिनेट की पहली बैठक में ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि सीमा सुरक्षा और केंद्र प्रायोजित विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नंदिनी चक्रवर्ती के लंबे प्रशासनिक अनुभव और गृह विभाग में उनकी कार्यशैली को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त अधिकारी माना। यह निर्णय इस बात का भी संकेत है कि नई सरकार अनुभवी नौकरशाहों के प्रशासनिक कौशल का उपयोग करना चाहती है, चाहे उनका राजनीतिक समीकरण पूर्व सरकार से जुड़ा रहा हो।
अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में मजबूत पहचान
पश्चिम बंगाल कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती प्रशासनिक हलकों में अत्यंत अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारी मानी जाती रही हैं। गृह विभाग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में काम करने के बाद उन्हें राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव बनने का अवसर मिला था। हालांकि उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहा, लेकिन प्रशासनिक निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन में उनकी भूमिका की अक्सर चर्चा होती रही है। विकास कार्यों की प्रधान समन्वयक के रूप में अब उन्हें केंद्र प्रायोजित योजनाओं की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य भी सौंपा गया है।
चुनाव घोषणा के बाद अचानक हुई थी विदाई
नंदिनी चक्रवर्ती का मुख्य सचिव पद से हटाया जाना उस समय काफी चर्चा में रहा था। 15 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा किए जाने के कुछ ही घंटों बाद निर्वाचन आयोग ने उन्हें पद से हटा दिया था। इस फैसले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया था। चूंकि उन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था, इसलिए यह निर्णय तत्कालीन राजनीतिक माहौल में बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।
नई सरकार के फैसले से बढ़ी राजनीतिक हलचल
अब शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा नंदिनी चक्रवर्ती पर भरोसा जताए जाने से राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देने और शासन व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। साथ ही यह संदेश भी देने की कोशिश है कि नई सरकार केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर निर्णय लेने के बजाय प्रशासनिक दक्षता को महत्व देना चाहती है। आने वाले समय में नंदिनी चक्रवर्ती की भूमिका राज्य प्रशासन और केंद्र-राज्य समन्वय में कितनी प्रभावशाली रहती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।