नई दिल्ली. दुनिया भर में मौसम के पैटर्न को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण समुद्री प्रक्रिया एल नीनो के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्ष 2026 के मध्य से इसके शुरू होने की संभावना है, जो वर्ष के अंत तक मजबूत रूप ले सकता है। इस बदलाव से वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम की चरम स्थितियों का खतरा बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
ला नीना के अंत के साथ बदलता महासागरीय संतुलन
हाल ही में जारी आकलनों के अनुसार वर्तमान में प्रभावी ठंडी ला नीना अवस्था समाप्ति की ओर है। इसके बाद प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य स्थिति में आकर धीरे-धीरे गर्म चरण की ओर बढ़ सकता है। यह परिवर्तन एल नीनो के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करता है, जिससे आने वाले समय में मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वैश्विक तापमान में वृद्धि की आशंका
एल नीनो के सक्रिय होने पर पृथ्वी के औसत तापमान में लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस तक अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। यदि महासागर का तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक हो जाता है, तो इसे शक्तिशाली एल नीनो माना जाएगा। वर्ष के अंत तक ऐसे मजबूत चरण की संभावना भी जताई जा रही है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और तीव्र कर सकता है।
चरम मौसम घटनाओं का बढ़ता खतरा
एल नीनो के प्रभाव से विभिन्न क्षेत्रों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग हो सकता है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इस प्रकार यह वैश्विक स्तर पर असंतुलित मौसम की स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे जनजीवन और कृषि पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
विभिन्न देशों में अलग-अलग प्रभाव
दक्षिणी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में सूखे और जंगल की आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जबकि दक्षिण अमेरिकी क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। भारत में मानसून की वर्षा कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं कुछ यूरोपीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान अधिक ठंड का अनुभव हो सकता है।
अतीत के संकेत और भविष्य की चेतावनी
पूर्व में आए शक्तिशाली एल नीनो ने वैश्विक तापमान को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया था और ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ पिघलने जैसी घटनाएं सामने आई थीं। वर्तमान संकेतों को देखते हुए वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसी प्रकार की स्थिति दोहराई जाती है, तो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
सतर्कता और तैयारी की आवश्यकता
एल नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए यह आवश्यक हो जाता है कि देश और समाज समय रहते तैयारी करें। जल प्रबंधन, कृषि योजना और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सतर्कता बरतना जरूरी है, ताकि इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सके और जनजीवन को सुरक्षित रखा जा सके।