अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में जारी संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से एक पीस बोर्ड के गठन का ऐलान किया है। इसे गाजा में शांति लाने की दिशा में दूसरे चरण का प्रयास माना जा रहा है। इस बोर्ड का मकसद राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय स्तर पर समाधान तलाशना है, ताकि लंबे समय से जारी हिंसा पर विराम लगाया जा सके।
पीस बोर्ड में शामिल दिग्गज नाम
डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड के चेयरमैन होंगे। बोर्ड में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को भी शामिल किया गया है। इन सभी के साथ वर्ल्ड बैंक के मौजूदा चीफ अजय बंगा को सदस्य बनाए जाने से इस बोर्ड की वैश्विक अहमियत और बढ़ गई है।
भारत के लिए क्यों खास है अजय बंगा की भूमिका
इस पीस बोर्ड में अजय बंगा की नियुक्ति भारत के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है। भारतीय मूल के अजय बंगा वर्तमान में वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष हैं और वैश्विक आर्थिक नीतियों में उनकी गहरी समझ मानी जाती है। गाजा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पुनर्निर्माण, विकास और वित्तीय स्थिरता के लिए उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है।
पुणे से दुनिया तक का सफर
अजय बंगा का जन्म महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके हैं, जिससे अनुशासन और नेतृत्व के गुण उन्हें विरासत में मिले। शुरुआती जीवन से ही उन्होंने शिक्षा और मेहनत को प्राथमिकता दी, जो आगे चलकर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की नींव बनी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी और IIM से मिली मजबूत शिक्षा
अजय बंगा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने IIM अहमदाबाद से MBA किया। करियर की शुरुआत उन्होंने 1980 के दशक में नेस्ले कंपनी से की, जहां करीब एक दशक तक विभिन्न जिम्मेदारियों को संभाला। यहीं से उनका कॉर्पोरेट और वैश्विक नेतृत्व का सफर शुरू हुआ, जो उन्हें वर्ल्ड बैंक के शीर्ष पद तक ले गया।
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