होली बाज़ार में मिलने वाले कई रंगों पर ‘हर्बल’ या ‘प्राकृतिक’ लिख दिया जाता है, लेकिन इसकी कोई स्पष्ट मानक व्यवस्था नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार बाज़ार में उपलब्ध कई रंग सिर्फ नाम मात्र के ‘हर्बल’ होते हैं। उन्हें अधिक चमकदार और लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए मिलावटी रसायनों, कृत्रिम सुगंध और सिंथेटिक कलर का उपयोग कर लिया जाता है, जिससे त्वचा को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे उत्पाद सिर्फ टैग का फायदा उठाकर ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।
प्राकृतिक तत्व भी कर सकते हैं नुकसान
हल्दी, मेहंदी, फूलों का रस या पत्तों का चूर्ण जैसी चीजें प्राकृतिक होने के बावजूद हर त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं होतीं। यदि इन्हें अधिक मात्रा में मिलाया जाए या अन्य तत्वों के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाए, तो कई लोगों में जलन, लालिमा या एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है। यह भी सच है कि प्राकृतिक रंगों का टेक्सचर आमतौर पर थोड़ा खुरदरा होता है। जब रंग पानी के संपर्क में आकर त्वचा पर बार-बार रगड़ा जाता है, तो घर्षण से त्वचा छिल सकती है या संवेदनशील स्थानों पर जलन बढ़ सकती है।
संवेदनशील त्वचा वालों के लिए अधिक सावधानी
जिन लोगों को पहले से दाद, एक्जिमा, मुहांसे या किसी प्रकार की त्वचा-एलर्जी की समस्या हो, उनके लिए यह जोखिम और बढ़ जाता है। संवेदनशील त्वचा थोड़ी-सी बाहरी उत्तेजना पर भी तीव्र प्रतिक्रिया दे सकती है, इसलिए ऐसे लोगों को भले ही रंग पूरी तरह हर्बल दिखे, उसे सावधानी से ही उपयोग करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा भी बेहद नाज़ुक होती है, इसलिए इन रंगों से उनमें जलन की संभावना अधिक रहती है।
त्वचा की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय
रंग लगाने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट करना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है, जिससे यह पता चल सकता है कि रंग आपकी त्वचा के साथ किस तरह प्रतिक्रिया करेगा। रंग खेलने से पहले नारियल तेल या किसी अच्छे मॉइस्चराइज़र की परत लगाने से त्वचा पर सुरक्षा कवच बनता है, जिससे रंग गहराई तक नहीं समाता। रंग को बहुत लंबे समय तक त्वचा पर न रहने दें और स्नान के समय जोर से रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से साफ करें। इससे त्वचा को अनावश्यक खिंचाव या क्षति से बचाया जा सकता है। यदि रंग खेलने के बाद जलन, खुजली या लालिमा दो-तीन दिनों से अधिक बनी रहती है, तो बिना देर किए त्वचा विशेषज्ञ से मिलना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
सही जानकारी के साथ सुरक्षित होली मनाएँ
होली का त्योहार रंगों की खुशी और मेलजोल का प्रतीक है, लेकिन गलत प्रकार के रंग या लापरवाही इसे तकलीफदेह बना सकती है। ‘हर्बल’ शब्द पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय समझदारी से चुनाव करना और अपने शरीर की जरूरतों को ध्यान में रखना आवश्यक है। त्योहार में उत्साह जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी है अपनी त्वचा की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी।
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