कोलकाता डेस्क: दही भारतीय खान-पान का अहम हिस्सा है। खाने के साथ या खाने के बाद दही का सेवन काफी आम है। स्वाद के साथ-साथ इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन आजकल बाजार में कई तरह की पैकेट वाली दही भी आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि घर पर जमाई गई दही बेहतर है या बाजार में मिलने वाली पैकेट वाली दही। दही की गुणवत्ता, ताजगी और उसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया भी सेहत के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, दही का चुनाव करते समय उसकी ताजगी और स्टोरेज का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं घर की और पैकेट वाली दही में क्या अंतर है।
घर की दही बेहतर
घर पर जमाई गई दही को आमतौर पर ताजगी के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है।डॉक्टर बिपिन विभूते के अनुसार, घर में तैयार की गई ताजा दही सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। दही की गाढ़ापन मुख्य रूप से इस्तेमाल किए गए दूध पर भी निर्भर करता है।गाय के दूध से तैयार दही अपेक्षाकृत कम गाढ़ी होती है और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी कम हो सकती है। वहीं, भैंस के दूध से बनी दही अधिक गाढ़ी होती है और इसमें प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। घर पर दही जमाने में दूध और इस्तेमाल किए गए कल्चर की गुणवत्ता पर भी नियंत्रण रहता है। हालांकि, दही जमाने के दौरान साफ-सफाई और सही तापमान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसलिए साफ तरीके से तैयार की गई ताजा घरेलू दही रोजाना के सेवन के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है।
ताजा दही में बैक्टीरिया की मात्रा
दही में मौजूद लाइव बैक्टीरिया उसकी गुणवत्ता और संभावित स्वास्थ्य लाभों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। डॉक्टर बिपिन विभूते के अनुसार, दही जमने के करीब 12 से 24 घंटे के दौरान बैक्टीरिया की गतिविधि अच्छी रहती है।इसी वजह से ताजा घर की दही को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। दही को लंबे समय तक रखने पर उसकी गुणवत्ता और स्वाद में बदलाव आ सकता है। स्टोरेज की अवधि बढ़ने के साथ उसके पोषण संबंधी गुणों में भी बदलाव संभव है। इसलिए दही को जरूरत से ज्यादा दिनों तक स्टोर करने के बजाय ताजा सेवन करना बेहतर माना जाता है। दही को हमेशा साफ और उचित तापमान पर रखना भी जरूरी है, ताकि उसमें अवांछित बैक्टीरिया न पनपें। इस तरह ताजी और सही तरीके से रखी गई दही भोजन का पौष्टिक हिस्सा बन सकती है।
पैकेट वाली दही को लेकर सवाल
बाजार में मिलने वाली पैकेट वाली दही भी सुविधाजनक विकल्प है और इसे तैयार करने के लिए नियंत्रित प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि, पैकेट वाली दही की शेल्फ लाइफ घर की ताजी दही से काफी ज्यादा हो सकती है।डॉक्टर बिपिन विभूते के अनुसार, बाजार में उपलब्ध कुछ पैकेट वाली दही की लाइफ 10 से 25 दिनों तक हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ता के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि उसमें कितने लाइव और उपयोगी बैक्टीरिया मौजूद हैं।हालांकि, हर पैकेट वाली दही में केमिकल या प्रिजर्वेटिव होना जरूरी नहीं है, इसलिए लेबल की जानकारी देखना महत्वपूर्ण है। दही खरीदते समय एक्सपायरी डेट, सामग्री, स्टोरेज निर्देश और पोषण संबंधी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। पैकेट खुलने के बाद उसे निर्धारित तापमान पर रखकर जल्द इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इसलिए सुविधा के लिए पैकेट वाली दही ली जा सकती है, लेकिन ताजगी और लेबल की जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।