धार: धार जिले में लोकायुक्त इंदौर की टीम ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति नालछा के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर के तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। लोकायुक्त की टीमें नालछा, सोड़पुर और मांडव में दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में अब तक करीब 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये की संपत्ति और खर्च का पता चला है। वहीं, करीब 20 साल के सेवाकाल में उनका अनुमानित वेतन लगभग 65 लाख रुपये बताया गया है।
तीन ठिकानों पर एक साथ लोकायुक्त की कार्रवाई
लोकायुक्त इंदौर को शिकायत मिली थी कि सहकारी समिति प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर ने अपने करीब 20 साल के सेवाकाल में आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है।शिकायत के आधार पर मंगलवार को लोकायुक्त की तीन टीमों ने एक साथ सोड़पुर, नालछा और मांडव में छापेमारी की। टीमों ने मकान, जमीन, वाहनों और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।
मकान, व्यावसायिक भवन और कृषि भूमि मिली
लोकायुक्त की शुरुआती जांच में प्रबंधक से जुड़ी कई संपत्तियों का पता चला है। इनमें शामिल हैं
सोड़पुर में दो मंजिला मकान।
नालछा में व्यावसायिक भवन।
पत्नी के नाम पर कृषि भूमि।
जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर।
कार और बुलेट मोटरसाइकिल।
कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरण।
65 लाख वेतन, 2.41 करोड़ की संपत्ति और खर्च का पता चला
लोकायुक्त के मुताबिक, शेरसिंह ठाकुर के करीब 20 साल के सेवाकाल में अनुमानित वेतन लगभग 65 लाख रुपये रहा है। वहीं, अब तक की जांच में करीब 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये की संपत्ति और खर्च सामने आया है।प्रारंभिक आंकलन के अनुसार, सामने आई संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय से 271 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद संपत्ति और आय का अंतिम आंकलन किया जाएगा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
मामले में लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। फिलहाल तीन टीमें अलग-अलग स्थानों पर जांच कर रही हैं।लोकायुक्त की कार्रवाई पूरी होने के बाद संपत्तियों के वास्तविक मूल्य, आय के स्रोत और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच जारी
धार जिले में हुई इस कार्रवाई के बाद सहकारी समिति प्रबंधक की संपत्तियों को लेकर जांच तेज हो गई है। लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि करीब 20 साल के सेवाकाल में अर्जित संपत्ति और खर्च का स्रोत क्या रहा है।