आबू (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय एवं राजयोग फाउंडेशन की ओर से मानसरोवर आध्यात्मिक परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘उत्कृष्ट प्रशासन के लिए कर्मयोग’ में मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने गीता के कर्मयोग सिद्धांत को प्रशासन में नैतिकता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता लाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि कर्मयोग केवल प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने का मार्ग नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा भी देता है।
मानवीय मूल्यों के ह्रास का प्रशासन पर भी पड़ रहा प्रभाव
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में मानवीय मूल्यों का निरंतर क्षरण हो रहा है, जिसका प्रभाव प्रशासनिक वर्ग पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार आयोग में पारिवारिक विवादों तथा वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण से जुड़ी शिकायतों के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने जिलों के प्रवास के दौरान सामने आए ऐसे प्रकरणों का भी उल्लेख किया, जिनमें प्रशासनिक अधिकारियों के असंवेदनशील व्यवहार के कारण नागरिकों ने आत्मघाती कदम उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में प्रशासकों के लिए मूल्यों के संवर्धन और मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है। इस दृष्टि से सम्मेलन का आयोजन अत्यंत सामयिक है।

कर्मयोगी मिशन के साथ गीता के सिद्धांतों को अपनाने की जरूरत
डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि लोक सेवकों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें जनकेंद्रित बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने मिशन कर्मयोगी की शुरुआत की है। हालांकि, प्रशासन में वास्तविक नैतिकता और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए गीता के कर्मयोग सिद्धांतों को व्यवहार में उतारना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसे अधिकारियों की आवश्यकता है, जो अपने दायित्वों का निर्वहन केवल पद और अधिकार के आधार पर नहीं, बल्कि सेवा भावना के साथ करें।
अधिकारों का उपयोग अहंकार नहीं, जनसेवा के लिए हो
डॉ. सिंह ने प्रशासकों को संदेश देते हुए कहा कि अधिकारियों को मिले अधिकार अहंकार और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा के लिए हैं। प्रत्येक लोक सेवक को इस भावना को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पद के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। इसलिए अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार में संवेदनशीलता, विनम्रता और जवाबदेही का भाव होना चाहिए।

राजयोग मेडिटेशन से प्रशासनिक कार्यों में मिली सकारात्मक दिशा
स्वयं राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करने वाले डॉ. सिंह ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा किए। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा में कार्य के दौरान सत्ता परिवर्तन के समय प्रशासनिक कार्यों में राजयोग मेडिटेशन के सफल उपयोग का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों से गीता के कर्मयोग सिद्धांत तथा राजयोग मेडिटेशन को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से न केवल प्रशासनिक कार्यों में उत्कृष्टता लाई जा सकती है, बल्कि व्यक्तिगत जीवन को भी बेहतर बनाकर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

देश-विदेश के प्रशासकों और विशिष्ट अतिथियों की रही सहभागिता
सम्मेलन के इस सत्र में राजस्थान सरकार की मंत्री डॉ. मंजू बाघमार, ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई, नेपाल के राजदूत जेपी आचार्य, प्रशासनिक विंग की उपाध्यक्ष बीके पूनम दीदी, जम्मू के जीएसटी कमिश्नर महेश भारद्वाज तथा राष्ट्रीय प्रशासन प्रभाग के समन्वयक राजयोगी हरीश भाई सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों और नेपाल से आए अधिकारियों, प्रबंधकों एवं प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इससे पूर्व राजयोगी बहनों ने डॉ. अवधेश प्रताप सिंह का आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन बीके डॉ. रीना बहन ने किया।