इंदौर। इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर अब ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान का मुद्दा गरमा गया है। संस्था पुरुषार्थ के अध्यक्ष नानूराम कुमावत ने मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखकर पूछा है कि कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण रूप से सामूहिक गान कराया जाएगा या नहीं। संस्था का कहना है कि यदि कार्यक्रम वास्तव में गैरराजनीतिक और केवल विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है, तो राष्ट्रभावना से जुड़े इस विषय पर किसी तरह की राजनीतिक झिझक नहीं होनी चाहिए।
‘छात्रों की गूंज’ में वंदे मातरम् होगा या नहीं?
संस्था पुरुषार्थ ने अपने पत्र में जीतू पटवारी से स्पष्ट जवाब मांगा है कि 19 सितंबर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण रूप से सामूहिक गान होगा या नहीं। संस्था का तर्क है कि विद्यार्थियों को देश के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण की विरासत से जोड़ना भी जरूरी है।
‘गैरराजनीतिक कार्यक्रम’ पर उठाया सवाल
पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम को छात्रों से जुड़े विषयों पर केंद्रित और गैरराजनीतिक बताया जा रहा है। संस्था पुरुषार्थ ने सवाल उठाया कि यदि आयोजन किसी राजनीतिक दल का निजी कार्यक्रम नहीं है, तो फिर राष्ट्रीय गीत के पूर्ण सामूहिक गान को लेकर कोई आपत्ति या झिझक क्यों होनी चाहिए? संस्था ने कहा कि छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़े कार्यक्रम में राष्ट्रभावना को भी प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। उसके मुताबिक, विद्यार्थियों को देश की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता की भावना से जोड़ना किसी राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा
पत्र में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रजागरण की भावना का महत्वपूर्ण माध्यम रहा। संस्था ने इसे केवल गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की चेतना और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया। पत्र में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2025-26 में आयोजित राष्ट्रीय स्मरण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। संस्था ने कहा कि ऐसे समय में जब देशभर में वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को याद किया जा रहा है, तब विद्यार्थियों के बड़े कार्यक्रम में इसका सामूहिक गान होना राष्ट्रभावना को मजबूत करने वाला कदम होगा।
जिन्ना और मुस्लिम लीग के विरोध का भी जिक्र
संस्था पुरुषार्थ ने अपने पत्र में वंदे मातरम् को लेकर इतिहास में मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों का भी उल्लेख किया है। पत्र में कहा गया है कि दिसंबर 1908 में मुस्लिम लीग के तत्कालीन अध्यक्ष सैयद अली इमाम ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय नारे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद 1937 में मुस्लिम लीग के विरोध और 17 मार्च 1938 को मोहम्मद अली जिन्ना की ओर से इसके गायन पर आपत्ति का भी हवाला दिया गया है। संस्था ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को वर्तमान राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस की मौजूदा भूमिका पर सवाल उठाया है। हालांकि, इन ऐतिहासिक दावों को प्रकाशित करने से पहले मूल ऐतिहासिक स्रोतों से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना उचित रहेगा।
‘इंदौर करे पुकार, पूर्ण वंदे मातरम् हर बार’
पत्र में इंदौर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी उल्लेख किया गया है। संस्था ने कहा कि मां अहिल्याबाई होलकर की कर्मभूमि इंदौर में हजारों विद्यार्थियों की मौजूदगी में यदि वंदे मातरम् का सामूहिक स्वर गूंजता है, तो यह किसी राजनीतिक दल की जीत नहीं बल्कि राष्ट्रभावना और स्वतंत्रता की विरासत की जीत होगी।
संस्था ने इसी मुद्दे को लेकर नारा दिया है- ‘इंदौर करे पुकार, पूर्ण वंदे मातरम् हर बार।’
वंदे मातरम् पर समझौता नहीं, बहिष्कार की चेतावनी
नानूराम कुमावत ने पत्र में स्पष्ट किया है कि संस्था पुरुषार्थ राष्ट्रभावना और वंदे मातरम् के सम्मान के मुद्दे पर समझौता नहीं करेगी। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि 19 सितंबर के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के सामूहिक गान को स्थान नहीं दिया गया, तो वह कार्यक्रम के बहिष्कार के लिए बाध्य होगी।
जीतू पटवारी से सार्वजनिक जवाब की मांग
संस्था पुरुषार्थ ने जीतू पटवारी से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संस्था का कहना है कि यदि ‘छात्रों की गूंज’ वास्तव में गैरराजनीतिक कार्यक्रम है, तो उसमें बिना किसी राजनीतिक झिझक के वंदे मातरम् का पूर्ण सामूहिक गान होना चाहिए।