MP ED Raid: मध्यप्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विवाह सहायता योजना से जुड़े कथित 30.18 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन CEO शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद भोपाल की विशेष PMLA कोर्ट ने उन्हें 9 सितंबर तक ED की हिरासत में भेज दिया है। मामला वर्ष 2019 से नवंबर 2021 के बीच सिरोंज जनपद पंचायत में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच में करीब 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता मामलों में राशि मंजूर किए जाने की बात सामने आई है।
30 करोड़ से ज्यादा की रकम का मामला, जांच में CEO पर फोकस
ED की कार्रवाई विवाह सहायता योजना के तहत सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी है। आरोप है कि योजना की राशि निकालने के लिए फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध मामलों में राशि किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुई और सरकारी धन को किन खातों के जरिए निकाला गया।
2 सितंबर को गिरफ्तारी, PMLA कोर्ट ने 9 सितंबर तक भेजा रिमांड पर
ED ने शोभित त्रिपाठी को 2 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें भोपाल की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने जांच एजेंसी की मांग पर उन्हें 9 सितंबर तक ED कस्टडी में भेज दिया। इस अवधि में एजेंसी कथित फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और योजना के लाभार्थियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।
2019 से 2021 के बीच की भूमिका की हो रही जांच
शोभित त्रिपाठी पर आरोप उस अवधि से जुड़े हैं, जब वह 2019 से नवंबर 2021 तक सिरोंज जनपद पंचायत के CEO के पद पर थे। इसी दौरान विवाह सहायता योजना के तहत हजारों मामलों में राशि मंजूर किए जाने की जांच की जा रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि जिन मामलों को संदिग्ध बताया जा रहा है, उनमें पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।
5,923 संदिग्ध मामलों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
इस मामले में करीब 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता प्रकरणों की जांच जारी है। आरोप है कि इन मामलों में सरकारी सहायता राशि जारी करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों का सहारा लिया गया। ED अब इस पूरे पैटर्न को मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी देख रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग से हासिल रकम का आगे क्या हुआ।
लॉकडाउन के दौरान भी बांटी गई थी सहायता राशि
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि से जुड़ा है। आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान भी विवाह सहायता योजना के तहत राशि वितरित की गई थी। ED की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि उस समय योजना के नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और संदिग्ध मामलों में भुगतान किस आधार पर किया गया।
EOW की FIR के बाद ED ने शुरू की मनी लॉन्ड्रिंग जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW की FIR से हुई। इसी आधार पर ED ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की। अब जांच एजेंसी सरकारी राशि के कथित फर्जीवाड़े, संदिग्ध बैंक खातों, दस्तावेजों और भुगतान की पूरी श्रृंखला को जोड़कर मामले की पड़ताल कर रही है।
अब आगे क्या होगा?
शोभित त्रिपाठी को 9 सितंबर तक ED की कस्टडी में भेजे जाने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। एजेंसी के सामने सबसे अहम सवाल 5,923 संदिग्ध मामलों में भुगतान की प्रक्रिया, दस्तावेजों की सत्यता और रकम के लेनदेन से जुड़े हैं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी की पड़ताल तथा अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।