भोपाल/इंदौर: मध्यप्रदेश में नगरीय विकास और शहरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 28 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘अर्बन कॉन्क्लेव’ का शुभारंभ करेंगे। इस आयोजन में शहरी अधोसंरचना, निवेश, डिजिटल गवर्नेंस, जल सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के दौरान इंदौर, उज्जैन और रीवा की विकास परियोजनाओं के लिए कुल 2,013 करोड़ रुपये जुटाने से जुड़े बैंकिंग समझौते भी किए जाएंगे।
निवेशकों से करेंगे वन-टू-वन चर्चा
मुख्यमंत्री निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठक कर शहरी विकास परियोजनाओं, निवेश की संभावनाओं और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा करेंगे। सरकार का उद्देश्य शहरों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने के साथ नागरिकों को बेहतर बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
₹2,013 करोड़ के विकासकार्यों के लिए होंगे समझौते
अर्बन कॉन्क्लेव के दौरान तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए वित्तीय समझौते प्रस्तावित हैं। इनका उद्देश्य जल प्रदाय व्यवस्था, सीवरेज सुविधाओं और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अधोसंरचना को बेहतर बनाना है।
प्रमुख समझौते इस प्रकार हैं
इंदौर नगर निगम: जल प्रदाय संवर्धन और सीवरेज परियोजना के लिए बैंक ऑफ इंडिया के साथ 1,320 करोड़ रुपये का ऋण अनुबंध।
उज्जैन विकास प्राधिकरण: मंदिर सर्किट को आधुनिक और सुगम बनाने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ 643 करोड़ रुपये का ऋण अनुबंध।
रीवा नगर निगम: जल प्रदाय संवर्धन योजना के क्रियान्वयन के लिए HDFC बैंक के साथ 50 करोड़ रुपये का सैद्धांतिक समझौता।
इन तीनों प्रस्तावित समझौतों की कुल राशि 2,013 करोड़ रुपये है। इनसे संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से नागरिक सुविधाओं में सुधार और शहरी विकास को गति देने का लक्ष्य है।
छोटे शहरों के विकास पर रहेगा विशेष फोकस
कॉन्क्लेव में महानगरों के साथ श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें शहरों के नियोजित विस्तार, आवास, पुनर्विकास और परिवहन आधारित विकास जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
प्रमुख विषयों में शामिल हैं
मास्टर प्लान और विकास गलियारों का निर्माण
पुनःघनीकरण और शहरी क्षेत्रों का पुनर्विकास
परिवहन आधारित विकास (TOD) और विकास अधिकार हस्तांतरण (TDR)
आवास परियोजनाएं और RERA संबंधी स्वीकृतियां
FAR, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों में कमी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
इन विषयों पर चर्चा का उद्देश्य शहरी परियोजनाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
डिजिटल गवर्नेंस से आसान होंगी सरकारी प्रक्रियाएं
अर्बन कॉन्क्लेव में नगरीय प्रशासन को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (ABPAS), ऑनलाइन NOC और विकास अनुज्ञा प्रणाली जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।इसके अलावा GIS आधारित नियोजन, डिजिटल गवर्नेंस, कॉलोनी अधिनियम और परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली पर भी चर्चा होगी।इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य भवन निर्माण की अनुमति, विकास संबंधी स्वीकृतियों और शहरी परियोजनाओं के प्रबंधन को अधिक सरल और प्रभावी बनाना है।
जल सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूल शहरों पर मंथन
कॉन्क्लेव में जलवायु अनुकूल शहरों, जल सुरक्षा और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
चर्चा के प्रमुख विषय होंगे
शहरी जल प्रबंधन और जल का पुनः उपयोग
अमृत 2.0 और हरित नगरीय विकास
सिटी फॉरेस्ट और सेंट्रल पार्क का विकास।
वायु गुणवत्ता में सुधार
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
ठोस कचरा प्रबंधन और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF)
कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा और CBG इकोसिस्टम
इन पहलों के माध्यम से शहरों में प्रदूषण कम करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर जोर दिया जाएगा।
ग्रीन बॉन्ड और PPP मॉडल से जुटाए जाएंगे संसाधन
शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना भी कॉन्क्लेव का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), वित्तीय मॉडलिंग, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड और टेंपल बॉन्ड जैसे विकल्पों पर चर्चा की जाएगी।इसके साथ ही बहुपक्षीय बैंकों से वित्तपोषण, अनुदान, संयुक्त उपक्रम और वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसे माध्यमों पर भी विचार होगा।सरकार का प्रयास है कि शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों के नए विकल्प तैयार किए जाएं और निजी निवेश की भागीदारी बढ़ाई जाए।
निवेशकों के साथ मुख्यमंत्री करेंगे बैठक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कॉन्क्लेव के दौरान निवेशकों के साथ सीधे संवाद करेंगे। इन बैठकों में शहरी क्षेत्र में निवेश, परियोजनाओं की तैयारी, क्रियान्वयन और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी।कुल मिलाकर, इंदौर में आयोजित होने वाला यह अर्बन कॉन्क्लेव मध्यप्रदेश के शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।