मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सागर और बड़वानी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को अपनी बुनियादी मांगों और सम्मान के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था लगातार खराब स्थिति की ओर जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि 21वीं सदी में क्या इसी तरह की शिक्षा व्यवस्था के जरिए बच्चों का भविष्य बनाया जाएगा।
सागर की घटना का कमलनाथ ने किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सागर जिले के एक स्कूल की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां बच्चों को अपने हैंडपंप पर कथित कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन करना पड़ा।उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित स्कूल के बच्चों को उचित स्कूल भवन के बजाय गोदाम में पढ़ाई करनी पड़ रही थी।
बड़वानी के एकलव्य स्कूल का मामला भी उठाया
कमलनाथ ने बड़वानी जिले के जामली स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़े मामले का भी जिक्र किया।उनके अनुसार, विद्यार्थियों ने अपने साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार और जातिसूचक टिप्पणियों के विरोध में प्रदर्शन किया। कमलनाथ ने इस तरह की शिकायतों को गंभीर बताते हुए शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों को सम्मानजनक और भेदभाव रहित वातावरण उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया।
कमलनाथ ने सरकार से पूछा- बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा?
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में सवाल उठाया कि यदि बच्चों को पढ़ाई के दौरान पानी जैसी बुनियादी सुविधा और सम्मान के लिए भी आंदोलन करना पड़े, तो ऐसी स्थिति में उनके भविष्य को लेकर क्या संदेश जाता है।उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य को आकार देने की जगह हैं और विद्यार्थियों को अपनी न्यूनतम जरूरतों के लिए सड़क पर उतरने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।