भोपाल. मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति और विभागीय जिम्मेदारियों में फेरबदल की तैयारियां चल रही हैं। इस बीच प्रदेश के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी दिल्ली के स्तर पर निगरानी के दायरे में हैं। मामला दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की बड़ी कंपनियों को सरकारी काम दिलाने से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इन चर्चाओं ने प्रशासनिक गलियारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
गृह और नगरीय विकास विभाग में संभावित बदलाव
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि गृह विभाग और नगरीय विकास एवं आवास विभाग में जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं। अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल को गृह विभाग से हटाकर किसी अन्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के दायित्वों में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इन संभावित परिवर्तनों को प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय में भी हो सकते हैं परिवर्तन
विभागीय फेरबदल का असर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार सीएमओ में पदस्थ तीन आईएएस अधिकारियों को वहां से हटाया जा सकता है। इनमें दो सचिव स्तर के अधिकारी और एक ओएसडी शामिल बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर सचिव स्तर के एक अधिकारी को सेवा विस्तार दिए जाने की भी चर्चा है। मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न विभागों में अधिकारियों को दिए गए अतिरिक्त प्रभारों की संख्या कम करने की तैयारी भी चल रही है।
अतिरिक्त प्रभारों की संख्या घटाने की कवायद
प्रदेश में करीब 21 आईएएस अधिकारी अपने मूल विभाग के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं। इनमें कुछ अधिकारियों के पास दो से तीन अतिरिक्त विभागों का दायित्व है। आंतरिक समीक्षा में यह बात सामने आई है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण कई अधिकारियों का ध्यान उनके मूल विभागों के कामकाज से प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को सीमित करने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों की उपलब्धता कम होने के चलते इस प्रक्रिया में जनवरी 2027 तक का समय लग सकता है।
आईएएस पदोन्नति और जनवरी 2027 की समयसीमा
मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रस्तावित पदोन्नतियां 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होने की संभावना है। माना जा रहा है कि पदोन्नति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने पर विभागों में जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा करना आसान होगा। पदोन्नति के बाद प्रशासनिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे अतिरिक्त प्रभार की समस्या भी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
आईपीएस तबादलों और जिलों में बदलाव की संभावना
आईएएस अधिकारियों के साथ आईपीएस स्तर पर भी प्रशासनिक बदलाव की तैयारी बताई जा रही है। पुलिस विभाग में एक और तबादला सूची जारी होने की चर्चा है जिसमें पुलिस मुख्यालय के कुछ अधिकारियों को मैदानी जिम्मेदारी दी जा सकती है। बालाघाट और ग्वालियर जैसे जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती की संभावना जताई जा रही है। इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, विदिशा और रीवा सहित कुछ अन्य जिलों में भी बदलाव हो सकते हैं। अंतिम निर्णयों का इंतजार है लेकिन हलचल जरूर बढ़ गई है।