भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की नल-जल व्यवस्था की निगरानी अब डिजिटल माध्यम से की जाएगी। प्रदेश के करीब 27 हजार गांवों को सुजल आईडी दी जाएगी। यह आईडी उन गांवों को मिलेगी, जहां 100 प्रतिशत नल-जल का काम पूरा हो चुका है। सुजल आईडी को पीएम गतिशील प्लेटफार्म और जीआईएस मैपिंग से जोड़ा जाएगा। इसके जरिए जलापूर्ति व्यवस्था के स्रोत से लेकर प्रत्येक घर के नल तक पूरे नेटवर्क की परिसंपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। इससे जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी और परिसंपत्तियों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
27,102 गांवों तक पहुंचा नल कनेक्शन
मध्यप्रदेश में कुल 51,264 गांव हैं। इनमें से 27,102 गांवों तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है। वहीं, 24,162 गांवों में निर्माण कार्य अभी शुरू होना बाकी है। डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद जलापूर्ति से जुड़ी परिसंपत्तियों, नेटवर्क और कनेक्शन की जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर दर्ज किया जा सकेगा। इससे योजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के साथ-साथ भविष्य में रखरखाव और प्रबंधन को भी आसान बनाने की उम्मीद है।
क्या है सुजल आईडी?
सुजल आईडी को गांव की नल-जल व्यवस्था की डिजिटल पहचान के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें जल स्रोत, पाइपलाइन नेटवर्क और घरों तक पहुंचने वाली जलापूर्ति व्यवस्था से संबंधित परिसंपत्तियों का रिकॉर्ड शामिल रहेगा। जीआईएस मैपिंग से जुड़ने के बाद संबंधित नेटवर्क को डिजिटल नक्शे पर भी देखा जा सकेगा।