मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5,443 स्वीकृत पदों में से 3,571 पद यानी करीब 66 प्रतिशत पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए अब विभाग हर महीने भर्ती प्रक्रिया आयोजित करेगा।
नई व्यवस्था के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए अब हर बार मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की भर्ती प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हर महीने एमपी ऑनलाइन के माध्यम से आवेदन मंगाए जाएंगे और विभागीय चयन समिति आवेदनों की जांच से लेकर चयन तक की प्रक्रिया पूरी करेगी।
हर महीने 1 तारीख को जारी होंगे खाली पद
स्वास्थ्य विभाग के नए आदेश के मुताबिक हर महीने की 1 तारीख को विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पद एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर जारी किए जाएंगे। इन पदों के लिए डॉक्टर 15 तारीख तक आवेदन कर सकेंगे।आवेदनों की जांच के बाद पात्र उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को लगातार चलाकर सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को जल्द से जल्द दूर करना है।
विभागीय समिति करेगी डॉक्टरों का चयन
नई भर्ती व्यवस्था में चयन की जिम्मेदारी विभागीय समिति को दी गई है। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित समिति आवेदनों की जांच, साक्षात्कार, मेरिट तैयार करने और मूल दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेगी।समिति में संचालक राजपत्रित को सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा संबंधित विषय के विशेषज्ञ और एससी/एसटी वर्ग के नामांकित सदस्य भी समिति का हिस्सा होंगे।
चयनित डॉक्टर की पदस्थापना तय अस्पताल में होगी
भर्ती प्रक्रिया में चयनित विशेषज्ञ डॉक्टर को उसी अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान में पदस्थ किया जाएगा, जिसके लिए संबंधित पद जारी किया गया था।खास बात यह है कि चयनित डॉक्टर का तीन साल तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। इससे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने और ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
MPPSC भर्ती में भी नहीं भर पाए थे आधे पद
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली MPPSC भर्ती में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 988 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन इनमें से 50 प्रतिशत पद भी नहीं भर पाए थे।बार-बार भर्ती प्रक्रिया आयोजित होने और पद खाली रह जाने के कारण सरकार ने अब नियमित मासिक भर्ती व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था फिलहाल एक साल के लिए लागू की गई है।
आदेश में विशेषज्ञता के हिसाब से रिक्तियों के आंकड़ों पर सवाल
नई व्यवस्था के आदेश में विशेषज्ञता के अनुसार खाली पदों के आंकड़ों को लेकर भी विसंगतियां सामने आई हैं। आदेश में स्वीकृत और कार्यरत डॉक्टरों की संख्या के आधार पर रिक्त पदों का हिसाब कई जगह मेल नहीं खा रहा है।उदाहरण के तौर पर दंत चिकित्सा में 103 पद स्वीकृत बताए गए हैं और 3 डॉक्टर कार्यरत हैं। इस हिसाब से 100 पद खाली होने चाहिए, लेकिन आदेश में 52 रिक्त पद दर्ज किए गए हैं।
मानसिक रोग और चर्म रोग के आंकड़ों में भी अंतर
मानसिक रोग विशेषज्ञता में 39 पद स्वीकृत हैं और कोई डॉक्टर कार्यरत नहीं बताया गया है। ऐसे में 39 पद रिक्त होने चाहिए, लेकिन आदेश में 50 रिक्तियां दर्ज हैं।इसी तरह चर्म रोग विशेषज्ञता में 54 पद स्वीकृत हैं और 23 डॉक्टर कार्यरत हैं। इस हिसाब से 31 पद खाली होने चाहिए, जबकि आदेश में 68 रिक्त पद दर्ज किए गए हैं।
हालांकि सभी विशेषज्ञताओं को मिलाकर कुल 3,571 रिक्त पदों का आंकड़ा सही बताया गया है। विशेषज्ञता-वार आंकड़ों में अंतर को लेकर विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।
प्रोरेटा के आधार पर आवेदन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
आदेश में डॉक्टरों से प्रोरेटा किस आधार पर मंगाया जाएगा, इसे लेकर भी स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञता के अनुसार रिक्त पदों की संख्या और आवेदन प्रक्रिया में इस व्यवस्था का इस्तेमाल कैसे होगा, इसे लेकर सवाल बने हुए हैं।इसके बावजूद विभाग का मुख्य लक्ष्य लंबे समय से खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरना है।
66% पद खाली, मरीजों को मिल सकती है राहत
सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। नई मासिक भर्ती व्यवस्था से सरकार को उम्मीद है कि रिक्त पदों को तेजी से भरा जा सकेगा।
अगर हर महीने जारी होने वाले पदों पर समयबद्ध तरीके से भर्ती होती है, तो अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है और मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम हो सकती है।