भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को उर्वरक की आसान, पारदर्शी और जरूरत के मुताबिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘ई-विकास 2.0’ (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसान-हितैषी प्राथमिकताओं के साथ तैयार की गई यह डिजिटल व्यवस्था प्रदेश में उर्वरक वितरण को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, ई-विकास 2.0 के जरिए किसानों को अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार उर्वरक खरीदने की स्वतंत्रता दी गई है। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर उचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के साथ वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है।
किसान अपनी जरूरत के अनुसार खरीद सकेंगे खाद
ई-विकास 2.0 में उर्वरक खरीद की प्रक्रिया को पहले की तुलना में सरल बनाया गया है। किसान अपनी पसंद और आवश्यकता के मुताबिक बिना किसी अनावश्यक बंधन के उर्वरक खरीद सकेंगे। कृषक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की फसलवार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे अधिक उर्वरक पहली बार में ही प्राप्त कर सकेंगे। अतिरिक्त उर्वरक की मांग के लिए पहले लागू 50 शब्दों के विवरण की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। अब इसके स्थान पर आसान ड्रॉप-डाउन विकल्प उपलब्ध कराया गया है। भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता अब सीधे प्रति हेक्टेयर बैग के रूप में प्रदर्शित की जाएगी।
फसल क्षति की स्थिति में 48 घंटे में मिलेगा अनुमोदन
फसल क्षति अथवा अन्य आपात स्थिति में दोबारा उर्वरक की जरूरत पड़ने पर Exceptional Handling System को अधिक प्रभावी बनाया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित SDM या तहसीलदार को 48 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदन देना होगा। इससे वास्तविक जरूरत वाले किसानों को अतिरिक्त उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी। यदि किसान ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे रद्द करना चाहता है, तो पोर्टल पर टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद निरस्तीकरण का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।
जल्द शुरू होगी WhatsApp Bot सुविधा
डिजिटल नवाचार की दिशा में ई-विकास 2.0 पोर्टल पर जल्द ही WhatsApp Bot सुविधा शुरू की जाएगी। इसके जरिए किसान अपने मोबाइल से WhatsApp पर ‘Help’ या ‘मदद’ लिखकर उर्वरक से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इस सुविधा के माध्यम से किसान को:
- उर्वरक टोकन की जानकारी
- अधिकृत रिटेलर की जानकारी
- उर्वरक की उपलब्धता
- उठाव की तारीख
- टोकन की वैधता
- जैसी जानकारियां मिल सकेंगी।
डबल लॉक केंद्रों पर बढ़ाई जा सकेगी क्षमता
मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर भीड़ और प्रतीक्षा को नियंत्रित करने के लिए प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने की स्थिति में आवश्यकतानुसार क्षमता बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए +91-7880223344 हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किया गया है। इस नंबर पर शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
20 अगस्त से Farmer ID बनाने का विशेष अभियान
प्रदेश में किसानों की Farmer ID बनाने के लिए 20 अगस्त से विशेष अभियान शुरू किया गया है। अभियान का उद्देश्य सभी किसानों की Farmer ID तैयार करना, किसानों को अग्रिम उर्वरक उठाव के लिए प्रोत्साहित करना और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) की सदस्यता का विस्तार करना है। सरकार का मानना है कि Farmer ID और डिजिटल उर्वरक वितरण व्यवस्था के एकीकरण से किसानों को खाद प्राप्त करने में और अधिक सुविधा मिलेगी।
प्रदेश में पर्याप्त है यूरिया और DAP-NPK का स्टॉक
सरकार के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त एवं निर्बाध भंडारण उपलब्ध है। चालू खरीफ वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक 17.57 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध रहा है। इसमें से किसानों द्वारा 13.18 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उठाव किया जा चुका है। वर्तमान में 4.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। इसी तरह DAP और NPK की कुल उपलब्धता 11.43 लाख मीट्रिक टन रही, जिसमें से 7.23 लाख मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है। इसके बाद 4.20 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा प्रदेश में 3.17 लाख मीट्रिक टन Single Super Phosphate (SSP) भी वितरण के लिए उपलब्ध बताया गया है।
क्या है ई-विकास प्रणाली?
ई-विकास मध्यप्रदेश में किसानों को उर्वरक की पारदर्शी और जरूरत आधारित डिजिटल वितरण व्यवस्था उपलब्ध कराने वाली प्रणाली है। इसके जरिए किसान की भूमि और फसल से संबंधित जानकारी के आधार पर उसकी उर्वरक आवश्यकता निर्धारित करने में मदद मिलती है। किसान ई-टोकन बुक कर सकता है। वहीं उर्वरक निर्माता से लेकर सरकारी एजेंसी, सहकारी संस्था और निजी विक्रेता तक स्टॉक एवं वितरण की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाती है। किसान की पहचान और प्रोफाइल का सत्यापन भी व्यवस्था का हिस्सा है।
इस डिजिटल सिस्टम से किसानों को लंबी कतारों से राहत मिलने, खाद के वितरण में पारदर्शिता बढ़ने और उर्वरक की कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तीन जिलों से शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट
ई-विकास प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट 1 अक्टूबर 2025 को मध्यप्रदेश के विदिशा, शाजापुर और जबलपुर जिलों में शुरू किया गया था। अब इसके अनुभव और किसान संगठनों, निजी विक्रेताओं तथा अन्य हितधारकों से मिले सुझावों को शामिल करते हुए ई-विकास 2.0 को पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न हितधारकों से प्राप्त व्यावहारिक सुझावों को शामिल कर पोर्टल को सरल, पारदर्शी और अधिक उपयोगी बनाने का प्रयास किया है।