नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के इटारसी में केंद्रीय विद्यालय-1 की प्राचार्य श्रद्धा पाठक के खिलाफ सीबीआई ने रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि करीब 8 लाख रुपये के लंबित बिलों का भुगतान स्वीकृत करने के बदले 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। सीबीआई के सत्यापन में रिश्वत की मांग की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
ठेकेदार ने CBI से की थी शिकायत
भोपाल निवासी ठेकेदार ऋषि जैन ने 5 अक्टूबर को सीबीआई के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी और उनके परिवार की तीन अन्य फर्मों को सितंबर में जेम पोर्टल के माध्यम से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय-2, सीपीई इटारसी के तीन कमरों के नवीनीकरण का काम मिला था। ठेकेदार के अनुसार, काम का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा समय पर पूरा कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद करीब 8 लाख रुपये के बिलों का भुगतान लंबित था।
बिल पास करने के बदले 3 लाख रुपये मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लंबित भुगतान के संबंध में वह 3 अक्टूबर को प्राचार्य श्रद्धा पाठक के कक्ष में गए थे। इस दौरान बिलों का भुगतान स्वीकृत करने के बदले उनसे 3 लाख रुपये की अनुचित राशि की मांग की गई। बताया गया है कि इन बिलों को पास करने का प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार केंद्रीय विद्यालय-1 की प्राचार्य के पास था।
पहले भी भुगतान के नाम पर वसूली का दावा
शिकायतकर्ता ऋषि जैन ने केंद्रीय विद्यालय प्रशासन पर पहले भी अनुचित राशि मांगने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि अप्रैल में दबाव की स्थिति में उन्हें रिश्वत का भुगतान करना पड़ा था। उन्होंने इस कथित लेन-देन से जुड़े प्रमाण भी सीबीआई को उपलब्ध कराने की बात कही है।
CBI के सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा भोपाल ने मामले का गोपनीय सत्यापन शुरू किया। निरीक्षक अभिषेक सोनेकर को सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई। सीबीआई के अनुसार, 6 अक्टूबर को एक स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में शिकायत का भौतिक सत्यापन कराया गया। इस दौरान लंबित बिलों के भुगतान के बदले 3 लाख रुपये की मांग किए जाने की पुष्टि हुई।
निर्धारित व्यक्ति के जरिए रिश्वत लेने पर सहमति का आरोप
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्राचार्य 7 अक्टूबर को इटारसी में अपने निर्धारित व्यक्ति के माध्यम से कथित रिश्वत की राशि लेने पर सहमत हुई थीं। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद सीबीआई ने श्रद्धा पाठक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली। मामले में सीबीआई की ओर से आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।