भोपाल. कटनी जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर अलग-अलग नागरिक कानून होने के बजाय सभी के लिए समान व्यवस्था होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विवाह, तलाक और पारिवारिक कानूनों में समानता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान दायित्व सुनिश्चित करना है।
एक विवाह और तीन तलाक पर दिया बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कानूनी मान्यता केवल एक विवाह को ही मिलेगी। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि तीन तलाक की व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है और यदि कोई इस प्रकार की कार्रवाई करेगा तो उसके खिलाफ मौजूदा कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि भारत में तीन तलाक (तत्काल तलाक) पर पहले ही केंद्रीय कानून लागू है, जिसके तहत इसे दंडनीय अपराध घोषित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में सभी समुदायों की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया।
मानसून सत्र में पेश होगा प्रस्तावित विधेयक
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की कि राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि विधानसभा में विधेयक पेश करने से पहले इसे भोपाल के जगदीशपुर में प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य नागरिकों के बीच समानता और न्याय सुनिश्चित करना है तथा इसे व्यापक अध्ययन और विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
उच्च स्तरीय समिति ने सौंपी अंतिम रिपोर्ट
समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई को अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी थी। रिपोर्ट को तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की प्रमुख अनुशंसाएं, विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों, परंपराओं और वर्तमान व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन शामिल है। इसमें राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और विभिन्न राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। इस भाग में कुल दस अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनमें कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।
404 धाराओं वाला विधेयक मसौदा तैयार
रिपोर्ट का दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप है, जिसे सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति ने मध्य प्रदेश की मौजूदा प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। यही प्रारूप आगे चलकर विधानसभा में प्रस्तुत होने वाले विधेयक का आधार बन सकता है। विधेयक के अंतिम स्वरूप में सरकार और विधानसभा की प्रक्रिया के दौरान आवश्यक संशोधन भी संभव हैं।
कानून बनने की प्रक्रिया और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, समिति की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब अगला चरण मंत्रिमंडल की मंजूरी और उसके बाद विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने का होगा। यदि विधानसभा इस विधेयक को पारित करती है और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तभी यह कानून के रूप में लागू हो सकेगा। समान नागरिक संहिता का विषय लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र रहा है और मध्य प्रदेश की यह पहल भी व्यापक राजनीतिक तथा सामाजिक विमर्श का विषय बन सकती है। फिलहाल राज्य सरकार विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी हुई है।