इंदौर। पद्मश्री और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम ‘द मैन बिहाइंड द वर्डिक्ट’ में अपने जीवन, कानूनी सफर और देश के चर्चित मुकदमों से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि सच के साथ साहसपूर्वक खड़े रहना भी राष्ट्रभक्ति है। कार्यक्रम में उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर भी अपनी बात रखी और कहा कि न्यायपालिका को ऐसी अतिरिक्त टिप्पणियों से बचना चाहिए, जो उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े और निकम के कानूनी योगदान की सराहना की।
‘सच के साथ साहस से लड़ना भी राष्ट्रभक्ति है’
इंदौर के रविंद्र नाट्य गृह में संस्था सार्थक की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उज्ज्वल निकम ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुकदमे से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस मुकदमे से जुड़ा सफर उनके लिए गर्व का विषय रहा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कानून, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया की अहम भूमिका होती है। निकम ने कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में अभियोजन की जिम्मेदारी केवल अदालत में पक्ष रखने तक सीमित नहीं होती, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर न्याय तक पहुंचने की होती है। इसके लिए धैर्य, अनुशासन, तैयारी और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।
न्यायपालिका की अतिरिक्त टिप्पणियों पर भी रखी राय
कार्यक्रम के दौरान उज्ज्वल निकम ने न्यायपालिका की टिप्पणियों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को ऐसी अतिरिक्त टिप्पणियों से बचना चाहिए, जो उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं। उनका यह बयान न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों की टिप्पणियों की सीमाओं को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में सामने आया।
‘फिल्म का प्रचार करने नहीं, सार्थक संवाद के लिए आया हूं’
अपने जीवन और कानूनी सफर पर आधारित फिल्म ‘प्रहार : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ का जिक्र करते हुए निकम ने कहा कि वे इंदौर किसी फिल्म का प्रचार करने नहीं, बल्कि एक सार्थक संवाद के लिए आए हैं। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति के जीवन पर बनी फिल्म उसके संघर्ष, फैसलों, विचारों और अनुभवों को समझने का अवसर देती है। फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में निकम ने अपने पेशेवर जीवन के साथ उन अनुभवों को भी साझा किया, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और काम करने के तरीके को आकार दिया।
डॉक्टर बनना चाहते थे उज्ज्वल निकम
अपने शुरुआती जीवन की चर्चा करते हुए निकम ने बताया कि एक समय वह डॉक्टर बनना चाहते थे और उनके पिता की भी यही इच्छा थी। उनके पिता अनुशासनप्रिय थे और परिवार से मिले संस्कारों ने उनके जीवन में कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी के महत्व को मजबूत किया। निकम ने कहा कि जीवन में शुरुआती इच्छाएं और आगे की राह अलग हो सकती हैं, लेकिन जिस जिम्मेदारी को व्यक्ति स्वीकार करता है, उसे पूरी निष्ठा से निभाना जरूरी है। उनके जीवन से जुड़े इन प्रसंगों ने कार्यक्रम को आत्मीय आयाम दिया।
CM डॉ.मोहन यादव बोले- निकम का मध्य प्रदेश आना सम्मान की बात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने उज्ज्वल निकम का स्वागत करते हुए कहा कि उनके जैसी प्रतिष्ठित कानूनी शख्सियत का मध्य प्रदेश आना सम्मान की बात है। मुख्यमंत्री ने निकम की आगामी फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने आतंकवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मुकदमों में निकम के योगदान की सराहना की। उन्होंने संस्था सार्थक और कार्यक्रम के आयोजक दीपक जैन ‘टीनू’ के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
मां अहिल्या की प्रतिमा, शॉल और श्रीफल से सम्मान
कार्यक्रम में उज्ज्वल निकम का अभिनंदन मां अहिल्या की प्रतिमा, शॉल और श्रीफल भेंट कर किया गया। अपर महाधिवक्ता राहुल सेठी, सोनल गुप्ता और आयोजक दीपक जैन ‘टीनू’ ने उनका स्वागत किया। उनकी पत्नी ज्योति निकम का भी सम्मान किया गया। स्टेट बार एसोसिएशन, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और जिला बार एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों सहित विधिक क्षेत्र की कई हस्तियों ने भी निकम का अभिनंदन किया।
न्याय जगत की हस्तियां और जनप्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी, जीतू जिराती, गोलू शुक्ला, पद्मश्री भालू मोंढे, डॉ. राजीव चौधरी और प्रकाश जैन सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता और युवा अधिवक्ता भी आयोजन में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ। इस दौरान 26/11 मुंबई आतंकी हमले के शहीदों और निर्दोष पीड़ितों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। आयोजन का संचालन उप महाधिवक्ता श्रेयराज सक्सेना और शासकीय अधिवक्ता दृष्टि रावल ने किया।
संस्था सार्थक की पहल
संस्था सार्थक की ओर से आयोजित ‘द मैन बिहाइंड द वर्डिक्ट’ का उद्देश्य उज्ज्वल निकम के जीवन और कानूनी अनुभवों के माध्यम से कानून, न्याय, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित जैसे विषयों पर संवाद करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विधिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और शहर के नागरिकों की सहभागिता रही।