यूपी में कांवड़ यात्रा को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश पर सियासी संग्राम लगातार जारी है। जहां पुलिस इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देकर बचाव कर रही है तो वहीं विपक्षी दलों के नेता इस फैसले को भेदभावपूर्ण बता रहे हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ का फरमान
सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में कांवड़ मार्गों पर खाने-पीने की दुकानों के मालिकों को नेमप्लेट लगाने का आदेश जारी किया है। जारी आदेश में कहा गया है कि, कांवड़ मार्गों पर खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानों पर संचालक मालिक का नाम और पहचान लिखना होगा। कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए ये फैसला लिया गया है। वहीं आगे आदेश में हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कार्रवाई की बात कही गई है। इधर इस मामले को लेकर सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। योगी सरकार के इस आदेश पर विपक्ष हमलावर नजर आ रहा हैं।
मायावती ने कहा- फैसला वापस ले सरकार
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। मायावती ने अपने सोशल मीडिया साइट X पर पोस्ट किया है कि, यह नया सरकारी आदेश गलत परंपरा है जो सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगाड़ सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अपने इस लिखा में आगे कहा है कि, सरकार को इसे जनहित में तुरंत वापस लेना चाहिए।
ओवैसी की सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनौती
वहीं इससे पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए योगी सरकार पर छुआछूत को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। AIMIM चीफ ओवैसी ने कहा है कि, मैं सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनौती देता हूं कि, अगर हिम्मत है तो लिखित आदेश जारी करें।
अखिलेश यादव ने बताया ‘सामाजिक अपराध’
वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश को ‘सामाजिक अपराध’ करार दिया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने अदालतों से इस मामले को खुद संज्ञान लेने का अनुरोध किया। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, और जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते है, उसके नाम से क्या पता चलेगा?’अपने इस लेख में सपा प्रमुख ने लिखा है कि, माननीय न्यायालय स्वत: संज्ञान ले और ऐसे प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जांच करवाकर, उचित दंडात्मक कार्रवाई करे। ऐसे आदेश सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं।